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आदि शंकराचार्य की जन्मस्थली पहुंचे मोरारी बापू, वैदिक रीति रिवाज और मंत्रोच्चार के साथ हुआ स्वागत

Mon, 12 Oct 2026 02:41 AM IST
Bhaskar Tiwari वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम

15 दिवसीय भारत स्वस्तिक यात्रा के दूसरे दिन रविवार को प्रसिद्ध रामकथा वाचक संत मोरारी बापू केरल के कालडि पहुंचे। यहां उन्होंने महान दार्शनिक और अद्वैत वेदांत के प्रमुख प्रवर्तक आदि शंकराचार्य की जन्मस्थली के दर्शन किए। उनके आगमन पर वैदिक रीति-रिवाजों और मंत्रोच्चार के साथ पारंपरिक तरीके से स्वागत एवं सत्कार किया गया। इस अवसर पर धार्मिक वातावरण देखने को मिला और श्रद्धालुओं ने संत मोरारी बापू के आगमन को आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना। कालडि को आदि शंकराचार्य की जन्मभूमि के रूप में विशेष पहचान प्राप्त है। यही कारण है कि इस पवित्र स्थल पर मोरारी बापू का पहुंचना भारत स्वस्तिक यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव रहा। यात्रा का उद्देश्य भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं, सनातन संस्कृति और देश की धार्मिक विरासत से जुड़े स्थलों का दर्शन करना है।

कालडि में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए मोरारी बापू ने भगवान शिव की महिमा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान शिव समस्त सृष्टि के मूल आधार हैं और सभी देवी-देवता उनकी आराधना करते हैं तथा उनसे ऊर्जा प्राप्त करते हैं। उनके अनुसार, महादेव समस्त शक्तियों के केंद्र हैं और सृष्टि की कोई भी शक्ति उनकी परिधि से बाहर नहीं है। मोरारी बापू ने अपने संबोधन में शिव के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए श्रद्धालुओं को भारतीय धार्मिक परंपराओं और आध्यात्मिक चिंतन की महत्ता से परिचित कराया। उनके विचारों में भगवान शिव को सृष्टि के आधार और समस्त शक्तियों के केंद्र के रूप में प्रस्तुत किया गया। इस दौरान आदि शंकराचार्य की विरासत और सनातन धर्म में उनके योगदान का भी उल्लेख किया गया।

मोरारी बापू ने आदि शंकराचार्य के ज्ञान और उनके कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अपने अद्भुत ज्ञान के माध्यम से संपूर्ण विश्व और सनातन धर्म की महान सेवा की है। उनके योगदान के लिए पूरा विश्व समाज हमेशा कालडि का ऋणी रहेगा। आदि शंकराचार्य ने भारतीय दर्शन, वेदांत और आध्यात्मिक चिंतन को व्यापक स्तर पर प्रतिष्ठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनकी जन्मस्थली कालडि आज भी श्रद्धालुओं और आध्यात्मिक जिज्ञासुओं के लिए विशेष महत्व रखती है। मोरारी बापू के संबोधन में आदि शंकराचार्य की ज्ञान परंपरा के प्रति सम्मान और भारतीय संस्कृति की गौरवशाली विरासत का संदेश प्रमुखता से सामने आया।

जानकारी के अनुसार, संत मोरारी बापू लगभग 900 लोगों के साथ दो विशेष ट्रेनों से करीब 9,000 किलोमीटर लंबी भारत स्वस्तिक यात्रा पर निकले हैं। यह यात्रा कुल 15 दिनों की है और इसके माध्यम से देश के विभिन्न धार्मिक एवं आध्यात्मिक स्थलों तक पहुंचने का कार्यक्रम है। यात्रा के दूसरे दिन केरल के कालडि में उनका पड़ाव रहा, जहां उन्होंने आदि शंकराचार्य की जन्मस्थली के दर्शन किए और श्रद्धालुओं को संबोधित किया। वैदिक मंत्रोच्चार, पारंपरिक स्वागत और आध्यात्मिक विचारों से जुड़ा यह कार्यक्रम भारत की धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति सम्मान का प्रतीक रहा। कालडि में यात्रा का यह पड़ाव आदि शंकराचार्य की विरासत, भगवान शिव की महिमा और सनातन धर्म के आध्यात्मिक संदेश को केंद्र में रखने वाला महत्वपूर्ण अवसर बना।
 

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