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FSSAI ने दिया बच्चों के खाने में चीनी पर रोक का प्रस्ताव, इस नियम में होगा बदलाव!

Sun, 18 Oct 2026 03:30 AM IST
Bhaskar Tiwari वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम

खाद्य सुरक्षा और बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने शिशुओं के लिए खाद्य उत्पादों से जुड़ी नियमावली में महत्वपूर्ण बदलाव का प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव के तहत छह माह तक की आयु के शिशुओं के लिए तैयार किए जाने वाले खाद्य उत्पादों में फ्रुक्टोज और सुक्रोज मिलाने पर प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य जीवन के शुरुआती चरण में बच्चों को अतिरिक्त चीनी के सेवन से बचाना और उनके लिए सुरक्षित एवं आयु के अनुरूप पोषण सुनिश्चित करना है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार, इस कदम से शिशु पोषण से संबंधित सुरक्षा उपायों को और मजबूत करने में मदद मिलेगी।

एफएसएसएआई ने खाद्य सुरक्षा और मानक (शिशु पोषण के लिए खाद्य पदार्थ) विनियम, 2020 में संशोधन के लिए मसौदा अधिसूचना जारी की है। इसमें छह माह तक के शिशुओं के लिए लक्षित खाद्य उत्पादों में सुक्रोज और फ्रुक्टोज के इस्तेमाल को प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव शामिल है। सुक्रोज सामान्य तौर पर चीनी में पाया जाता है, जबकि फ्रुक्टोज एक प्रकार की प्राकृतिक शर्करा है, जो फलों सहित कई खाद्य पदार्थों में मौजूद होती है। इन शर्कराओं को खाद्य उत्पादों में अलग से मिलाने पर रोक लगाने का प्रस्ताव शिशुओं के शुरुआती पोषण को अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

प्रस्तावित बदलाव खाद्य सुरक्षा और मानक संशोधन विनियम, 2026 के अंतर्गत लाए गए हैं। इसका उद्देश्य मौजूदा नियामक व्यवस्था को मजबूत करना और यह सुनिश्चित करना है कि शिशुओं के लिए बनाए जाने वाले पोषण उत्पाद उनकी उम्र तथा पोषण संबंधी जरूरतों के अनुरूप हों। जीवन के पहले छह महीने बच्चे के विकास के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इस दौरान उचित पोषण शारीरिक विकास और स्वास्थ्य की नींव तैयार करने में अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में शिशुओं के खाद्य उत्पादों में अतिरिक्त शर्करा के इस्तेमाल को नियंत्रित करने के लिए नियमों में बदलाव का प्रस्ताव रखा गया है।

एफएसएसएआई ने इस मसौदा अधिसूचना को सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किया है। इसके तहत संबंधित हितधारक अधिसूचना प्रकाशित होने की तारीख से 60 दिनों के भीतर अपनी आपत्तियां और सुझाव प्रस्तुत कर सकते हैं। इस प्रक्रिया में खाद्य उद्योग से जुड़े पक्षों, विशेषज्ञों और अन्य संबंधित लोगों को प्रस्तावित नियमों पर अपनी राय रखने का अवसर मिलेगा। प्राप्त सुझावों और आपत्तियों पर विचार करने के बाद नियामक आगे की प्रक्रिया तय कर सकता है।

इस प्रस्ताव के पीछे प्रमुख उद्देश्य बच्चों के जीवन के शुरुआती चरण में अतिरिक्त चीनी के संभावित जोखिम को कम करना और शिशु पोषण उत्पादों की गुणवत्ता तथा सुरक्षा को बेहतर बनाना है। हालांकि, फिलहाल यह एक प्रस्तावित संशोधन है, इसलिए इसे लागू हो चुका नियम नहीं माना जाना चाहिए। अंतिम अधिसूचना जारी होने के बाद ही इसके लागू होने की स्थिति और संबंधित प्रावधानों की स्पष्ट जानकारी सामने आएगी। यह पहल भारत में शिशु पोषण से जुड़े मानकों को अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकती है।

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