देश में चीनी की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने और घरेलू बाजार में पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति दी थी। इसके लिए सरकार ने टैरिफ रेट कोटा (TRQ) योजना का सहारा लिया है। हालांकि, सरकार की ओर से तय किए गए पूरे आयात कोटे के लिए अब तक पर्याप्त आवेदन नहीं मिले हैं। 10 लाख टन के कुल घोषित कोटे में से 7,97,450 टन चीनी के आयात के लिए आवेदन प्राप्त हो चुके हैं और उनका आवंटन भी किया जा चुका है। इसके बावजूद 2,02,550 टन यानी करीब 20.25 प्रतिशत कोटा अभी भी खाली है। इसी बचे हुए कोटे को पूरा करने के लिए विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने योग्य चीनी मिल मालिकों और रिफाइनरों से नए आवेदन आमंत्रित किए हैं।
डीजीएफटी ने 1 सितंबर 2026 को जारी अपने पब्लिक नोटिस में कहा कि 20 अगस्त 2026 को अधिसूचित 10 लाख टन के TRQ के मुकाबले पिछले नोटिस के तहत 7,97,450 टन के लिए आवेदन प्राप्त हुए और उनका आवंटन कर दिया गया। इसके बाद योजना के तहत 2,02,550 टन कच्ची चीनी का कोटा अभी उपलब्ध है। सरकार अब चाहती है कि इस शेष मात्रा के लिए भी पात्र आयातकों की पहचान जल्द की जाए, ताकि घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाई जा सके और कीमतों पर दबाव कम किया जा सके।
चीनी की कीमतों में तेजी का सीधा असर आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ खाद्य एवं पेय पदार्थ उद्योग पर भी पड़ता है। घरेलू उत्पादन और बाजार में उपलब्धता के बीच संतुलन बनाए रखना सरकार के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे में शुल्क मुक्त आयात के जरिए अतिरिक्त चीनी उपलब्ध कराने का उद्देश्य आपूर्ति को मजबूत करना और कीमतों में अनावश्यक तेजी को रोकना है। TRQ व्यवस्था के तहत निर्धारित मात्रा में चीनी को तय शर्तों के अनुसार आयात किया जा सकता है, जिससे घरेलू बाजार में जरूरत के मुताबिक आपूर्ति बढ़ाने में मदद मिलती है।
अब DGFT द्वारा दोबारा आवेदन मंगाए जाने से उम्मीद है कि शेष 2,02,550 टन का कोटा भी योग्य चीनी मिल मालिकों और रिफाइनरों को आवंटित किया जा सकेगा। इससे आयात की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और आने वाले समय में घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ सकती है। सरकार का यह कदम ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है जब चीनी की कीमतों को नियंत्रित रखना और उपभोक्ताओं को राहत देना प्राथमिकता है। साथ ही, पूरे आयात कोटे का उपयोग होने से बाजार में आपूर्ति की स्थिति बेहतर होने और कीमतों पर दबाव कम होने की संभावना है।