हाथों में जोश, कदमों में रफ्तार और दिल में जागरूकता का संदेश लेकर मंगलवार को ऊना में युवा सड़क पर दौड़े। मौका था रेड रन मैराथन का, जहां दौड़ सिर्फ प्रतियोगिता तक सीमित नहीं रही, बल्कि युवाओं ने एचआईवी/एड्स के खिलाफ जागरूकता का संदेश भी समाज तक पहुंचाया। स्वास्थ्य विभाग की ओर से राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (नैको) के अभियान के तहत जिला मुख्यालय स्थित इंदिरा गांधी खेल परिसर में 5000 मीटर की रेड रन मैराथन आयोजित की गई। प्रतियोगिता में लड़के और लड़कियों ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया। मैराथन का शुभारंभ ऊना के एसडीएम अभिषेक मित्तल ने किया। इस दौरान उन्होंने युवाओं को एचआईवी/एड्स के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि बीमारी से बचाव के लिए सही जानकारी और जागरूकता बेहद जरूरी है। युवाओं से स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के साथ समाज में भी जागरूकता फैलाने का आह्वान किया गया। 5000 मीटर की इस दौड़ में लड़कियों के वर्ग में 25 और लड़कों के वर्ग में 24 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। प्रतिभागियों ने पूरे उत्साह के साथ दौड़ पूरी की। रेड रन मैराथन के जरिए युवाओं ने एचआईवी संक्रमण से संबंधित सही जानकारी लोगों तक पहुंचाने और समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करने का संदेश दिया। साथ ही एचआईवी से संक्रमित लोगों के प्रति भेदभाव खत्म करने की अपील भी की गई। प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागी को 2500 रुपये, द्वितीय को 2000 रुपये और तृतीय स्थान हासिल करने वाले को 1500 रुपये का पुरस्कार दिया गया। इसके अलावा सांत्वना पुरस्कार के तौर पर प्रतिभागियों को 700 रुपये प्रदान किए गए। रेड रन मैराथन में बेहतर प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों के लिए आगे बढ़ने का अवसर भी रखा गया है। दोनों वर्गों से पांच-पांच प्रतिभागियों का चयन राज्य स्तर पर आयोजित होने वाली प्रतियोगिता के लिए किया गया। कार्यक्रम में रेड रिबन क्लबों से जुड़े विद्यार्थियों ने भी सक्रिय सहभागिता की। विद्यार्थियों ने एचआईवी/एड्स को लेकर समाज में जागरूकता बढ़ाने और संक्रमण से प्रभावित लोगों के प्रति भेदभाव समाप्त करने का संदेश दिया। इस तरह ऊना में आयोजित रेड रन मैराथन ने खेल और सामाजिक जागरूकता को एक साथ जोड़ने का काम किया। युवाओं की भागीदारी ने यह संदेश दिया कि सही जानकारी और जागरूकता के जरिए एचआईवी/एड्स से जुड़े भ्रम और सामाजिक भेदभाव को कम करने की दिशा में प्रयास किए जा सकते हैं।