गेहूं की फसल बेचने के कई महीने बाद भी भुगतान नहीं मिलने से अम्ब उपमंडल के किसानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। किसानों का आरोप है कि उन्होंने मई 2026 में सरकारी खरीद केंद्रों और संबंधित एजेंसियों के माध्यम से गेहूं की फसल बेची थी, लेकिन अब तक कई किसानों के खाते में बिक्री की रकम नहीं पहुंची है। लंबे समय से भुगतान अटका होने के कारण किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो रहा है। किसानों का कहना है कि फसल बेचने के बाद मिलने वाली राशि उनके लिए केवल आमदनी का साधन नहीं होती, बल्कि इसी पैसे से परिवार की जरूरतें पूरी करने के साथ अगली फसल की तैयारी भी की जाती है। प्रभावित किसानों ने इस मामले को प्रशासन के समक्ष उठाते हुए जिलाधिकारी ऊना को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने संबंधित विभागों और खरीद एजेंसियों से लंबित भुगतान की स्थिति स्पष्ट करवाने तथा जल्द से जल्द किसानों की बकाया राशि जारी करवाने की मांग की है। किसानों के अनुसार खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। बीज, खाद, कीटनाशक, डीजल, जुताई-बिजाई और मजदूरी जैसे खर्चों के लिए समय पर पैसे की जरूरत होती है। गेहूं की बिक्री का भुगतान अटकने से इन खर्चों का इंतजाम करना मुश्किल हो रहा है। कई किसानों को अपनी कृषि संबंधी जरूरतें पूरी करने के लिए उधार या दूसरे स्रोतों से धन जुटाना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि यदि पुरानी फसल का भुगतान समय पर मिल जाता तो आगामी कृषि कार्यों के लिए आर्थिक दबाव कम होता। प्रभावित किसानों संदीप ठाकुर, विनोद कुमार, अश्विनी कुमार, कुलदीप कुमार, विपिन हाकम, रवि पठानिया, अजय कुमार और ओमपाल ने प्रशासन से मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। किसानों का कहना है कि उन्होंने फसल बिक्री से जुड़ी जरूरी औपचारिकताएं पूरी की थीं। इसके बावजूद भुगतान लंबित रहने की वजह स्पष्ट नहीं हो पाई है। उन्होंने प्रशासन से संबंधित विभाग और खरीद एजेंसियों से रिपोर्ट लेकर लंबित मामलों का जल्द निपटारा करवाने की मांग की है। किसानों ने उम्मीद जताई है कि प्रशासन मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित एजेंसियों से समन्वय कर बकाया भुगतान जारी करवाने की दिशा में जल्द कार्रवाई करेगा।