बरसात के दौरान पहाड़ियों से मलबा गिरने, सड़कों के घंटों से लेकर कई दिनों तक बंद रहने और यात्रियों की सुरक्षा पर खतरा मंडराने की समस्या से सिरमौर के लोगों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है। जिले की तीन संवेदनशील सड़क जगहों पर भूस्खलन की समस्या का वैज्ञानिक तरीके से स्थायी समाधान तलाशा जाएगा। इनमें नाहन-ददाहू मार्ग का नेहली क्षेत्र, शंभूवाला-मात्तरभेड़ों सड़क और हिमाचल-हरियाणा सीमा के समीप सराहां-चंडीगढ़ सड़क का हिस्सा शामिल है। इन स्थानों पर पहाड़ी खिसकने के कारणों का तकनीकी अध्ययन कर रोकथाम के उपाय तय किए जाएंगे। संबंधित विभाग ने विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट तैयार होने, स्वीकृति मिलने और बजट उपलब्ध होने के बाद सुरक्षा कार्य शुरू करने की योजना है। करीब एक महीने पहले एसटीएमएफ की टीम ने हिमाचल प्रदेश राजस्व विभाग के आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्यक्रम के तहत सिरमौर के पांच संवेदनशील स्थानों का निरीक्षण किया था। तकनीकी आकलन के बाद इनमें से तीन स्थानों को आगे की कार्रवाई के लिए चुना गया है। चांदनी के समीप का स्थान भी निरीक्षण में शामिल था, लेकिन फिलहाल तीन स्थानों को प्राथमिकता दी गई है। इन जगहों पर पहाड़ी की स्थिति के अनुसार ढलान को मजबूत करने, पानी की निकासी में सुधार करने और अन्य इंजीनियरिंग उपाय अपनाने की योजना है। किस स्थान पर कौन-सी तकनीक इस्तेमाल की जाएगी, इसका अंतिम निर्धारण डीपीआर तैयार होने के बाद होगा। नाहन-ददाहू सड़क पर नेहली के समीप हाल ही में बरसात के दौरान पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा गिरने के कारण मार्ग करीब एक सप्ताह तक बंद रहा था। लोक निर्माण विभाग की मशीनरी दिन-रात सड़क बहाली में जुटी रही, लेकिन पहाड़ी से बार-बार मलबा खिसकने के कारण परेशानी बनी रही। इस दौरान लोगों को आवाजाही में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। अभी भी इस स्थान पर खतरा पूरी तरह टला नहीं है और बड़ी चट्टानें गिरने की आशंका बनी हुई है। विभाग की मशीनरी यहां तैनात है। ऐसे में स्थायी समाधान की पहल से बार-बार सड़क बंद होने की समस्या कम होने की उम्मीद है। शंभूवाला-मात्तरभेड़ों सड़क पर हर बरसात में मलबा गिरने से यातायात बाधित होता है। कई बार बस सेवा बंद हो जाती है और ग्रामीणों को पैदल सफर करना पड़ता है। फिसलन और सड़क पर मलबा होने के कारण छोटे वाहनों से आवाजाही करना भी जोखिम भरा हो जाता है। वहीं, सराहां-चंडीगढ़ सड़क के हिमाचल-हरियाणा सीमा के समीप वाले हिस्से में भी भूस्खलन यात्रियों की सुरक्षा के लिए खतरा बना रहता है। अब इन तीनों स्थानों पर केवल मलबा हटाकर सड़क खोलने के बजाय समस्या की जड़ तक पहुंचकर समाधान करने की तैयारी है। हालांकि, सुरक्षा कार्यों की शुरुआत डीपीआर तैयार होने, संबंधित स्वीकृतियां मिलने और बजट उपलब्ध होने के बाद ही होगी। लोक निर्माण विभाग सिरमौर के अधीक्षण अभियंता अरविंद शर्मा ने बताया कि हिमाचल प्रदेश राजस्व विभाग के आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्यक्रम के तहत जिले की सड़कों पर पांच संवेदनशील स्थानों का निरीक्षण किया गया था। तकनीकी आकलन के बाद इनमें से तीन स्थानों को आगे की कार्रवाई के लिए चयनित किया गया है। उन्होंने बताया कि इन स्थानों की विस्तृत डीपीआर तैयार कर स्वीकृति के लिए भेजी जाएगी। स्वीकृति मिलने के बाद भूस्खलन की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में काम किया जाएगा।