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सिरमौर: जयराम ठाकुर बोले- कर्ज के बोझ तले दबा हिमाचल, विकास में चार दशक पीछे चला गया प्रदेश

हिमाचल प्रदेश की वित्तीय स्थिति और विकास कार्यों को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सुक्खू सरकार पर निशाना साधा है। नाहन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में प्रदेश पर लगातार कर्ज का बोझ बढ़ रहा है, लेकिन इसके बावजूद विकास कार्यों की रफ्तार धीमी पड़ गई है। जयराम ठाकुर ने कहा कि सुक्खू सरकार के कार्यकाल में हिमाचल प्रदेश विकास के मामले में चार दशक पीछे चला गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के पास विकास को लेकर कोई स्पष्ट रोडमैप नहीं है और प्रदेश को लगातार कर्ज के दलदल में धकेला जा रहा है। नेता प्रतिपक्ष ने सुक्खू सरकार पर राजनीतिक बदले की भावना से काम करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के समय खोले गए कई सरकारी संस्थानों को बंद किया जा रहा है। उनके अनुसार, इससे ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में लोगों को मिलने वाली सुविधाएं प्रभावित हो रही हैं। जयराम ठाकुर ने दावा किया कि प्रदेश में विकास कार्यों के बजाय संस्थानों को बंद करने और राजनीतिक फैसलों पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने सरकार से विकास कार्यों की प्राथमिकताएं स्पष्ट करने की मांग की। जयराम ठाकुर ने हाल ही में संपन्न पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों का हवाला देते हुए दावा किया कि जनता ने कांग्रेस सरकार की नीतियों को नकार दिया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की 11 जिला परिषदों में से 10 पर भाजपा समर्थित प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की है। इसके अलावा, 75 प्रतिशत से अधिक पंचायत प्रधान और बीडीसी सदस्य भाजपा समर्थित चुने गए हैं। नेता प्रतिपक्ष ने इन चुनाव परिणामों को आगामी विधानसभा चुनावों से जोड़ते हुए कहा कि जनता ने भाजपा के पक्ष में संकेत दिया है। हालांकि, पंचायती राज चुनावों के परिणामों को विधानसभा चुनावों का सीधा पूर्वानुमान मानना राजनीतिक दावा है, जिसकी पुष्टि आगामी चुनाव परिणामों से ही होगी। जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार ने अपने कार्यकाल में इतिहास का सबसे अधिक कर्ज लिया है। उन्होंने कहा कि यदि वित्तीय प्रबंधन में सुधार नहीं किया गया तो आने वाले समय में कर्मचारियों के वेतन और पेंशन पर भी संकट गहरा सकता है। उन्होंने सरकार से वित्तीय स्थिति पर श्वेतपत्र जारी करने, कर्ज की स्थिति स्पष्ट करने और विकास कार्यों के लिए ठोस योजना सामने रखने की मांग की। दूसरी ओर, सरकार की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया आने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट होगी।

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