राजधानी शिमला के टॉलैंड में वन्यजीवों के संरक्षण और मानव-वन्यजीव सहअस्तित्व को लेकर सेमिनार का आयोजन किया गया। इसमें जंगली जानवरों और इंसानों के बीच बढ़ते संपर्क को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। सेमिनार में जंगली जानवरों, पक्षियों और उनकी विभिन्न प्रजातियों के संरक्षण के साथ उनके प्राकृतिक आवास यानी जंगलों को सुरक्षित रखने पर मंथन किया गया। विशेषज्ञों ने इस बात पर भी चर्चा की कि वन्यजीवों और इंसानों के बीच ऐसा संतुलन कैसे बनाया जाए, जिससे दोनों को नुकसान से बचाया जा सके। हिमाचल प्रदेश में तेंदुआ, भालू और बंदरों के मानव बस्तियों में पहुंचने का मुद्दा भी सेमिनार में प्रमुखता से उठा। वन्यजीवों के आबादी वाले क्षेत्रों में आने से कई बार लोगों और जानवरों दोनों के लिए खतरा पैदा हो जाता है। ऐसे में इनके प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के उपायों पर चर्चा की गई। सेमिनार में भारतीय प्राणी सर्वेक्षण, कोलकाता के वन्यजीव संरक्षण अनुभाग के विशेषज्ञ वैज्ञानिक-ई एवं प्रभारी अधिकारी डॉ. ललित कुमार शर्मा ने उपस्थित लोगों को वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने वन्यजीवों और उनकी प्रजातियों को सुरक्षित रखने तथा उनके संरक्षण के महत्व से अवगत करवाया। कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश वन विभाग के वन्यजीव प्रभाग के कई अधिकारी, फॉरेस्ट गार्ड और वन मित्र भी मौजूद रहे। सेमिनार के माध्यम से वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ इंसान और वन्यजीवों के बीच बेहतर सहअस्तित्व स्थापित करने की जरूरत पर जोर दिया गया।