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कुल्लू: दशहरा उत्सव में पहुंचते ही बजंतरियों को मिले भत्ता, कारदार संघ के प्रस्ताव पर उठे सवाल

अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव में बजंतरियों को मिलने वाले भत्ते को लेकर विवाद सामने आया है। देव संस्कृति ट्रस्ट के मुख्य ट्रस्टी ओम प्रकाश शर्मा ने कारदार संघ की ओर से बजंतरियों को अग्रिम भत्ता देने के प्रस्ताव के विरोध पर सवाल उठाए हैं। ओम प्रकाश शर्मा के अनुसार, दशहरा उत्सव समिति की 24 सितंबर को हुई बैठक में बजंतरियों को उत्सव में पहुंचते ही भत्ता देने का प्रस्ताव रखा गया था। उनका कहना है कि इसके अगले ही दिन कारदार संघ ने बैठक कर इस व्यवस्था का विरोध किया और बजंतरियों को अग्रिम भत्ता नहीं देने की सिफारिश की। उन्होंने कहा कि बजंतरियों को उत्सव में पहुंचने के बाद उनके भत्ते के लिए इंतजार नहीं करवाया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, कारदार संघ को इस प्रस्ताव का विरोध करने के बजाय इसका समर्थन करना चाहिए था, क्योंकि इससे देव समाज से जुड़े बजंतरियों को सीधे लाभ मिलेगा। देव संस्कृति ट्रस्ट के मुख्य ट्रस्टी ने कारदार संघ की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने दावा किया कि संघ का कार्यकाल 2024 में पूरा हो चुका है, इसके बावजूद दोत राम ठाकुर अध्यक्ष पद पर बने हुए हैं। उन्होंने संघ की सदस्यता को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। ओम प्रकाश शर्मा ने दावा किया कि संघ में आधे से अधिक कारदार फर्जी तरीके से शामिल किए गए हैं। उन्होंने कुछ पदाधिकारियों के कारदार होने की प्रमाणिकता पर भी सवाल उठाए। हालांकि, ये आरोप ओम प्रकाश शर्मा की ओर से लगाए गए हैं। संबंधित कारदार संघ या जिन व्यक्तियों पर आरोप लगाए गए हैं, उनका पक्ष इस सामग्री में उपलब्ध नहीं है। ओम प्रकाश शर्मा ने कहा कि कुल्लू दशहरा में बजंतरियों की भूमिका महत्वपूर्ण है। उत्सव के दौरान देव परंपरा से जुड़े कार्यों में बजंतरियों की अहम भागीदारी रहती है। ऐसे में उन्हें मिलने वाले भत्ते को लेकर ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिससे उन्हें समय पर भुगतान मिल सके। उन्होंने कहा कि बजंतरियों को उत्सव में आने के बाद भत्ते के लिए इंतजार करवाने के बजाय शुरुआत में ही भुगतान करने की व्यवस्था बेहतर होगी। इस दौरान उन्होंने पूर्व सांसद महेश्वर सिंह और कुल्लू सदर विधायक सुंदर सिंह पर भी विभिन्न मुद्दों को लेकर निशाना साधा। मामले में अब निगाहें दशहरा उत्सव समिति और कारदार संघ की अगली कार्रवाई पर हैं। यदि दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे सामने आते हैं तो बजंतरियों के भत्ते और कारदार संघ की वैधता को लेकर विवाद और बढ़ सकता है।

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