एचआईवी-एड्स और टीबी जैसी गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के लिए केवल अस्पतालों और स्वास्थ्य विभाग की भूमिका ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज के स्तर पर जागरूकता भी उतनी ही जरूरी है। इसी उद्देश्य से धर्मशाला के क्षेत्रीय अस्पताल में स्वास्थ्य विभाग की ओर से रेड रिबन क्लबों के पदाधिकारियों के लिए कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में एचआईवी-एड्स की रोकथाम के साथ टीबी मुक्त भारत अभियान को गति देने के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। इसमें इस बात पर जोर दिया गया कि युवाओं और आम लोगों को बीमारियों से जुड़ी सही और प्रमाणिक जानकारी उपलब्ध कराई जाए, ताकि समय रहते जांच और उपचार की ओर कदम बढ़ाया जा सके। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने रेड रिबन क्लबों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि क्लबों के माध्यम से युवाओं तक स्वास्थ्य संबंधी संदेश आसानी से पहुंचाया जा सकता है। स्कूलों, कॉलेजों और समुदायों में जागरूकता गतिविधियों के जरिये एचआईवी-एड्स और टीबी से जुड़े भ्रम और गलत धारणाओं को दूर करने में मदद मिल सकती है। कार्यशाला में क्लब पदाधिकारियों से अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए सुझाव भी मांगे गए। अधिकारियों ने कहा कि स्थानीय स्तर पर युवाओं की भागीदारी बढ़ाकर जागरूकता कार्यक्रमों को ज्यादा प्रभावी बनाया जा सकता है। जिला टीबी उन्मूलन अधिकारी डॉ. राकेश सूद ने कहा कि किसी भी स्वास्थ्य अभियान की सफलता के लिए लोगों तक सही जानकारी पहुंचना बेहद जरूरी है। उन्होंने समय पर जांच कराने और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उपचार लेने के लिए लोगों को प्रेरित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जागरूकता के अभाव में कई लोग बीमारी के लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना जरूरी है। कार्यशाला के माध्यम से रेड रिबन क्लबों को स्वास्थ्य जागरूकता अभियानों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया गया। उद्देश्य यही है कि एचआईवी-एड्स की रोकथाम और टीबी उन्मूलन से जुड़े संदेश समाज के हर वर्ग तक पहुंचें और लोग समय पर जांच व उपचार के प्रति जागरूक हों।