सोच अगर कुछ नया करने की हो तो छोटी उम्र भी बड़ी तकनीकी कल्पना को जन्म दे सकती है। हमीरपुर की आठवीं कक्षा की छात्रा आराध्या ने ऐसा ही मॉडल तैयार कर अपनी रचनात्मक सोच का परिचय दिया है। हिम अकादमी पब्लिक स्कूल विकासनगर की छात्रा ने स्मार्ट इको सिटी का मॉडल बनाया है, जिसमें जरूरत के हिसाब से स्ट्रीट लाइट अपने आप जलने और बंद होने की व्यवस्था की गई है। कल्पना कीजिए कि रात में सुनसान सड़क पर स्ट्रीट लाइट बंद है, लेकिन जैसे ही कोई व्यक्ति या वाहन वहां पहुंचता है, सड़क रोशन हो जाती है। कुछ दूरी तय करने के बाद जब वहां कोई नहीं रहता तो लाइट फिर बंद हो जाती है। आराध्या का मॉडल इसी तकनीक को प्रदर्शित करता है। इस मॉडल की खासियत इसमें लगाए गए सेंसर हैं। आराध्या ने स्ट्रीट लाइट को एलडीआर (Light Dependent Resistor) और आईआर सेंसर से जोड़ा है। सेंसर सड़क पर होने वाली गतिविधि को पहचानने का काम करते हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति या वाहन सेंसर की निर्धारित सीमा में आता है, लाइट सक्रिय हो जाती है। उसके आगे निकल जाने के बाद रोशनी बंद हो जाती है। यानी खाली सड़क पर अनावश्यक रूप से पूरी रात बिजली खर्च करने की जरूरत नहीं होगी। मॉडल को सिर्फ सेंसर आधारित नहीं रखा गया है, बल्कि इसमें सौर ऊर्जा का भी इस्तेमाल किया गया है। इसमें सोलर पैनल, बैटरी, एलडीआर, आईआर सेंसर और ट्यूब लाइट को शामिल किया गया है। दिन के समय सोलर पैनल से बैटरी को चार्ज करने की व्यवस्था है। इसके बाद जरूरत पड़ने पर इसी ऊर्जा का इस्तेमाल स्ट्रीट लाइट के संचालन में किया जा सकता है। इस तरह मॉडल में बिजली बचाने के साथ वैकल्पिक ऊर्जा के इस्तेमाल की अवधारणा को भी जोड़ा गया है। आमतौर पर शहरों और सड़कों पर लगी स्ट्रीट लाइट रातभर जलती रहती हैं। कई जगहों पर जरूरत कम होने के बावजूद रोशनी लगातार जारी रहती है। इससे बिजली की खपत बढ़ती है। आराध्या के मॉडल में इस समस्या का समाधान सेंसर आधारित व्यवस्था के जरिये दिखाया गया है। सड़क खाली होने पर लाइट बंद रहेगी और जैसे ही किसी व्यक्ति या वाहन की मौजूदगी का पता चलेगा, रोशनी उपलब्ध हो जाएगी। मॉडल का उद्देश्य केवल बिजली बचाना नहीं है। सड़क पर चलते लोगों और वाहनों को अंधेरे में परेशानी न हो, इसके लिए जरूरत के समय पर्याप्त रोशनी उपलब्ध कराने की कल्पना भी इसमें शामिल है। इस तरह स्मार्ट स्ट्रीट लाइट व्यवस्था में ऊर्जा संरक्षण, सुरक्षित आवागमन और तकनीक तीनों को एक साथ जोड़ा गया है। आराध्या का यह मॉडल भविष्य के ऐसे शहर की तस्वीर पेश करता है, जहां तकनीक जरूरत के अनुसार संसाधनों का इस्तेमाल करे और बेवजह ऊर्जा खर्च न हो। छोटी उम्र में तैयार किया गया यह मॉडल यह भी दिखाता है कि स्मार्ट सिटी जैसी बड़ी अवधारणाओं को स्कूल स्तर पर भी समझा और प्रयोग के रूप में सामने रखा जा सकता है।