हिंदू धर्म में पितरों को याद करने और उनके प्रति श्रद्धा प्रकट करने के लिए पितृ पक्ष का विशेष महत्व माना जाता है। इस वर्ष पितृ पक्ष 26 सितंबर से शुरू होकर 10 अक्तूबर तक चलेगा। इन 15 दिनों के दौरान लोग अपने पूर्वजों की शांति के लिए पूजा-पाठ, दान-पुण्य और ब्राह्मण भोज सहित विभिन्न धार्मिक कार्य करेंगे। इस बार पितृ पक्ष की तिथियों में एक विशेष संयोग बन रहा है। इसके चलते चौथा और पांचवां श्राद्ध 30 सितंबर को एक ही दिन किया जाएगा। श्राद्ध कर्म दोपहर के समय किए जाने का विधान बताया गया है। 30 सितंबर को चतुर्थी तिथि दोपहर 2:50 बजे तक रहेगी और इसके तुरंत बाद पंचमी तिथि शुरू हो जाएगी। वहीं, अगले दिन यानी 1 अक्तूबर को दोपहर का समय आने से पहले ही पंचमी तिथि समाप्त हो जाएगी। इसी वजह से तिथि के नियम के अनुसार चतुर्थी और पंचमी दोनों का श्राद्ध 30 सितंबर की दोपहर को ही किया जाएगा। पूजा-पाठ और श्राद्ध कर्म के लिए दोपहर 12 बजे से पहले का समय उपयुक्त बताया गया है। इसी दौरान पूजा और भोजन संबंधी कर्म पूरे करने की बात कही गई है। कब होगा कौन सा श्राद्ध 26 सितंबर: पूर्णिमा श्राद्ध 27 सितंबर: पहला श्राद्ध 28 सितंबर: दूसरा श्राद्ध 29 सितंबर: तीसरा श्राद्ध 30 सितंबर: चौथा और पांचवां श्राद्ध 1 अक्तूबर: छठा श्राद्ध 2 अक्तूबर: सातवां श्राद्ध 3 अक्तूबर: आठवां श्राद्ध 4 अक्तूबर: नौवां श्राद्ध यानी मातृ नवमी 5 अक्तूबर: दसवां श्राद्ध 6 अक्तूबर: ग्यारहवां श्राद्ध 7 अक्तूबर: बारहवां श्राद्ध 8 अक्तूबर: तेरहवां श्राद्ध 9 अक्तूबर: चौदहवां श्राद्ध 10 अक्तूबर: सर्वपितृ अमावस्या 4 अक्तूबर को मातृ नवमी 4 अक्तूबर को मातृ नवमी का श्राद्ध होगा। दी गई जानकारी के अनुसार इस दिन परिवार की दिवंगत महिलाओं के लिए श्राद्ध किया जाता है। वहीं 9 अक्तूबर को चौदहवां श्राद्ध होगा। इस दिन अचानक या दुर्घटना में मृत्यु को प्राप्त हुए पूर्वजों के लिए श्राद्ध किए जाने की जानकारी दी गई है। पितृ पक्ष का समापन 10 अक्तूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा। यदि किसी पूर्वज की मृत्यु की तिथि ज्ञात नहीं है, तो इस दिन उनका श्राद्ध किया जा सकता है। पितृ पक्ष के इन 15 दिनों में श्रद्धालु अपने पूर्वजों का स्मरण करते हुए उनकी शांति के लिए धार्मिक अनुष्ठान, दान-पुण्य और अन्य कर्मकांड करते हैं।