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बाहर से दुरुस्त, अंदर बेहाल: धर्मशाला जिला मुख्यालय में गंदगी और अव्यवस्था

जिला मुख्यालय परिसर बाहर से भले ही व्यवस्थित दिखाई देता हो, लेकिन अंदरूनी हिस्सों में गंदगी और अव्यवस्था का आलम है। जरूरी सरकारी कार्यों के लिए रोजाना पहुंचने वाले सैकड़ों लोगों को बुनियादी सुविधाओं के अभाव में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मुख्यालय के पिछले हिस्से में, जहां नोटरी का काम होता है, वहां प्लास्टिक की बोतलों और कचरे के कारण नालियां पूरी तरह चोक पड़ी हैं। बारिश का पानी निकलने का रास्ता बंद होने से परिसर में जलभराव की स्थिति बन रही है। इससे लोगों की आवाजाही प्रभावित हो रही है और गंदगी के कारण संक्रमण का खतरा भी बढ़ सकता है। जिला मुख्यालय परिसर के शौचालयों में भी अव्यवस्था की शिकायत सामने आ रही है। कई शौचालयों में ब्लॉकेज की समस्या है, जबकि एक मंजिल पर शौचालय में ताला लगा होने के कारण लोगों की परेशानी और बढ़ गई है। सरकारी कार्यालय में आने वाले लोगों के लिए शौचालय जैसी बुनियादी सुविधा का सुचारु रूप से उपलब्ध न होना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। खाली काउंटरों पर फाइलों का ढेर ऑनलाइन व्यवस्था लागू होने के बाद सुगम केंद्र के कुछ काउंटर खाली पड़े हैं। इन काउंटरों पर फाइलों और दस्तावेजों के बस्ते लावारिस हालत में रखे हुए हैं। इससे न केवल परिसर का स्वरूप खराब हो रहा है, बल्कि महत्वपूर्ण दस्तावेजों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। फायर एक्सटिंग्विशर की रिफिलिंग अवधि खत्म सबसे गंभीर मामला आपात स्थिति में आग बुझाने के लिए लगाए गए अग्निशामक सिलेंडरों का है। परिसर में लगे फायर एक्सटिंग्विशर की रिफिलिंग की मियाद निकल चुकी है। ऐसे में आग लगने जैसी आपात स्थिति में इन उपकरणों के प्रभावी ढंग से काम करने पर संदेह बना हुआ है। जिला मुख्यालय जैसे महत्वपूर्ण सरकारी परिसर में स्वच्छता, जलनिकासी और अग्नि सुरक्षा की व्यवस्था दुरुस्त होना जरूरी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को मामले का संज्ञान लेकर चोक नालियों की सफाई, शौचालयों की मरम्मत, दस्तावेजों के उचित रखरखाव और फायर एक्सटिंग्विशर की समय पर रिफिलिंग सुनिश्चित करनी चाहिए।

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