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राजेश धर्माणी बोले- सवाल पूछने की जिज्ञासा ही अनुसंधान और आविष्कार का आधार

भराड़ी (बिलासपुर)। बाल विज्ञान कांग्रेस विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तार्किक चिंतन, रचनात्मकता और नवाचार की भावना विकसित करने का सशक्त मंच है। इसके माध्यम से बच्चों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने और आसपास की समस्याओं को वैज्ञानिक नजरिये से समझने का अवसर मिलता है। यह बात तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने शनिवार को दधोल स्कूल में आयोजित दो दिवसीय 33वीं जिला स्तरीय बाल विज्ञान कांग्रेस के समापन समारोह में कही। उन्होंने विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों की ओर से तैयार किए गए वैज्ञानिक मॉडलों की सराहना की और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया। धर्माणी ने कहा कि बाल विज्ञान कांग्रेस में प्रस्तुत मॉडल विद्यार्थियों की कल्पनाशीलता, अध्ययन और व्यावहारिक सोच को दर्शाते हैं। बच्चों ने अपने आसपास मौजूद समस्याओं और उनके संभावित समाधानों को मॉडलों के माध्यम से प्रस्तुत कर यह साबित किया है कि उनमें वैज्ञानिक समझ के साथ सामाजिक जिम्मेदारी की भावना भी विकसित हो रही है। विद्यार्थियों को चाहिए कि वे अपने आसपास की समस्याओं को समझें, उनके कारणों का विश्लेषण करें और वैज्ञानिक सिद्धांतों के आधार पर समाधान तलाशने का प्रयास करें।

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