आईजी वाई. पूरण कुमार आत्महत्या मामले में चर्चाओं में आए रोहतक के एसपी नरेंद्र बिजारणिया पर आखिरकार सरकार ने कार्रवाई कर दी है। आत्महत्या के पांच दिन बाद प्रदेश सरकार ने शनिवार को उन्हें उनके पद से हटा दिया। खास बात यह है कि फिलहाल उन्हें किसी अन्य स्थान पर पोस्टिंग नहीं दी गई है। गृह मंत्रालय की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि उनकी नई पोस्टिंग के आदेश अलग से जारी किए जाएंगे।
सरकार ने मधुबन पुलिस अकादमी में तैनात आईपीएस अधिकारी सुरेंद्र सिंह भोरिया को रोहतक का नया एसपी नियुक्त किया है। भोरिया इससे पहले स्टेट क्राइम ब्यूरो में एसपी के पद पर कार्यरत थे। वहीं, पीटीसी सुनारिया के आईजी वाई. के. पूरण कुमार की आत्महत्या के बाद यह पद अब भी रिक्त है और सरकार ने नए आईजी की नियुक्ति का आदेश अभी तक जारी नहीं किया है।
गौरतलब है कि 6 अक्तूबर को रोहतक के अर्बन एस्टेट थाने में एडीजीपी पूरण कुमार के सुरक्षाकर्मी हवलदार सुशील के खिलाफ केस दर्ज हुआ था। अगले दिन उसे अदालत में पेश कर जेल भेजा गया था। उसी दिन चंडीगढ़ में एडीजीपी पूरण कुमार ने आत्महत्या कर ली थी। उनकी आईएएस पत्नी ने आत्महत्या के लिए डीजीपी शत्रुजीत कपूर और एसपी नरेंद्र बिजारणिया को जिम्मेदार ठहराते हुए चंडीगढ़ पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई थी। इसी के बाद से बिजारणिया पर कार्रवाई की अटकलें तेज थीं।
2015 बैच के आईपीएस अधिकारी नरेंद्र बिजारणिया मूल रूप से राजस्थान के सीकर जिले के निवासी हैं। वे सेंट्रल एक्साइज एंड कस्टम विभाग में कार्यरत रहे, इसके बाद यूपीएससी परीक्षा पास कर हरियाणा कैडर में आईपीएस बने। अपने करियर की शुरुआत से ही वे चर्चा में रहे हैं।
साल 2017 में सिरसा में ट्रेनिंग के दौरान उन्होंने राजस्थान के गैंगस्टर आनंदपाल के भाई विक्की और देवेंद्र को गिरफ्तार करने में अहम भूमिका निभाई थी। उसी ऑपरेशन में आनंदपाल मारा गया था। 2023 में नूंह हिंसा के दौरान उन्हें नूंह का एसपी बनाकर भेजा गया था, जहां उन्होंने तेजी से हालात पर काबू पाया। उनके कार्यकाल में सीआईए टीमें लगातार सक्रिय रहीं और कई एनकाउंटर भी हुए। हालांकि वे जिले के कुख्यात गैंगस्टर हिमांशु उर्फ भाऊ को विदेश से लाने में सफल नहीं हो सके। सरकार की इस कार्रवाई से पुलिस विभाग में हलचल तेज हो गई है, जबकि रोहतक में नए एसपी के कार्यभार संभालने की तैयारी शुरू हो गई है।