समय बदल रहा है लेकिन अभिभावकों में जागरूकता की कमी घट रही है। प्राय: देखने को मिल रहा है कि बच्चों में कुपोषण बढ़ रहा है। छोटे बच्चे ज्यादातर चिप्स, कुरकुरे, चॉकलेट, चाऊमीन, बर्गर, पिज्जा खाना पसंद कर रहे हैं और अभिभावकों भी उन्हें खुशी-खुशी ये सब खिला रहे हैं। यह खाना उन्हें कुछ मिनट का स्वाद तो देता है लेकिन उनके स्वास्थ्य को हानि पहुंचा रहा है। जिला नागरिक अस्पताल में एक सप्ताह में छह से पांच वर्ष तक के करीब छह कुपोषित बच्चे पहुंच रहे हैं। चिकित्सक अभिभावकों की काउंसलिंग कर उन्हें जागरूक कर रहे हैं। मैं करीब एक साल से जिला नागरिक अस्पताल में अपनी सेवा दे रही हूं। तब से मैंने देखा है कि बच्चे के कुपोषित होने का मुख्य कारण अभिभावकों में जागरूकता की कमी है। बच्चों में कुपोषण बच्चे की दीर्घकालिक बीमारी से भी हो जाता है इसके साथ ही उचित आहार का अभाव, सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी होती है और इनका कारण अभिभावक की गरीबी होती है या उनमें जागरूकता की कमी है। कुपोषित बच्चा हर समय थकान और कमजोरी महसूस करता है, बार-बार सर्दी जुकाम, लंबाई और वजन कम बढ़ना, भूख न लगना और स्वभाव में चिड़चिड़ापन होता है। अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चे को पैकेट का खाना, चिप्स, कुरकुरे या तला हुआ बाहर का खाना न देकर उन्हें सीजन अनुसार और अपनी क्षमतानुसार फल खिलाएं। बच्चे को हरी सब्जी खिलाएं। यदि बच्चे में कोई भी कुपोषण का लक्षण दिखता है तो चिकित्सक से परामर्श लें।