महेंद्रगढ़। डिजिटल युग में रोजगार की संभावनाएं बढ़ भी रही हैं और कुछ स्थानों पर घट भी रही हैं। छात्राएं और गृहिणी अपनी कला की पहचान करें और इसको आदत बना लें। इसके बाद बाद आदत से रोजगार प्राप्त कर सकती हैं। ये बातें हकेंवि की प्लेसमेंट डिपार्टमेंट निदेशक डॉ. दिव्या ने अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से हारट्रॉन स्किल सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य वक्ता शिरकत करते हुए कही। उन्होंने कहा कि डिजिटल और तकनीकी जमाने में लोग इनका उपयोग तो कर रहे हैं, लेकिन रोजगार नहीं बना रहे हैं। इसके मुख्य कारण कौशल विकास, आत्मविश्वास और जानकारी का अभाव है। हर व्यक्ति की अपनी आदत होती है। काम करने से कभी-कभार जी चुरा लेते हैं, लेकिन आदत से कभी जी नहीं चुरा पाते। हमें स्वयं का मूल्य संवर्धन करना चाहिए और अपनी आदत को कौशल में बदलना चाहिए। इसके बाद यही आदत रोजगार का स्रोत बन सकती हैं। जैसे किसी को पेंटिंग बनानी आती है तो वह पेंटिंग को सोशल मीडिया व साइट पर डालकर बेच सकता है। इनके बनाते हुए वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर सकता है। इससे भी रोजगार बन सकता है। इसके लिए कार्य में विशेषता होनी जरूरी है। इसके साथ ही उन्होंने कुछ सरकार इंटर्नशिप योजनाओं, निजी कंपनी में साक्षात्कार पूरा करने और कौशल विकास करने के टिप्स बताए। वहीं, जीआर इंस्टीट्यूट के मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट पूर्व हैड ममता सोनी ने कहा कि आजकल यूपीआई पेमेंट का प्रयोग सभी करते हैं और फोन के प्रयोग से भी घर बैठे कमाई कर सकते हैं। पेमेंट निकालने या जमा कराने संबंधी कार्य, किसी कंपनी के बजट डिटेल भरने जैसे कार्य कर सकते हैं। इस दौरान छात्रा निशा, अनीता, पूजा ने संवाद व भाषा सुधार पर सवाल पूछे। कार्यक्रम में 45 छात्राओं ने भाग लिया और वक्ताओं के टिप्स दिनचर्या में शामिल करने का विश्वास दिलाया।