गांव धनौंदा की दक्ष प्रजापति धर्मशाला में चल रही श्रीमद् शिव महापुराण कथा के चौथे दिन शिवलिंग की कथा सुनाई। कथा वाचक आचार्य पूर्ण देव महाराज ने बताया कि शरीर की तुलना में मन की सुंदरता अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने शिवलिंग की महिमा का वर्णन करते हुए बताया कि इसके मध्य भाग में ब्रह्मा, विष्णु और महेश विराजमान हैं। केवल बीच की हथेली का स्पर्श करने से ही व्यक्ति का कल्याण हो जाता है। कथा में उपवास के बारे में एक नया दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए बताया कि उपवास का अर्थ भूखे रहना नहीं है। इसका वास्तविक अर्थ है कि नियमित रूप से शिव मंदिर जाकर एक लोटा जल अर्पित करना। पारिवारिक जीवन के बारे में उन्होंने कहा कि पति-पत्नी को एक-दूसरे का सम्मान करना चाहिए। बेटी की अच्छी परवरिश से उसका वैवाहिक जीवन सुखी होता है। कर्म के सिद्धांत पर कहा कि अच्छे कर्मों का अच्छा फल और बुरे कर्मों का बुरा फल भगवान शंकर अवश्य देते हैं। शिवलिंग, भगवान शिव का एक प्रमुख प्रतीक है और इसकी पूजा सनातन धर्म में विशेष रूप से की जाती है। शिवलिंग निराकार रूप में शिव की ऊर्जा और शक्ति का प्रतिनिधित्व करता है, जो अनंत, असीम और अविनाशी है। शिवलिंग का कोई आरंभ या अंत नहीं है, यह हमेशा से है और हमेशा रहेगा। यह ब्रह्मांड की धुरी है और प्रलयकाल में भी विद्यमान रहता है। शिवलिंग विश्व की संपूर्ण ऊर्जा का प्रतीक है, जो सृजन, पालन और संहार के लिए जिम्मेदार है। शिवलिंग एक महत्वपूर्ण प्रतीक है जो भगवान शिव की शक्ति और ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है। इसकी पूजा करने से मन शांत होता है, आत्मा को शांति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इस दौरान भानुप्रताप, पंकज, अशोक कुमार, तुलसी, नेत्रपाल, मंजू, राजबाला, नीरज, मंजीत, दीपा, प्रियंका, भारती, नेहा, रजनी, अंजना शर्मा, बलवंती देवी सहित अन्य मौजूद रही।