लघु सचिवालय में सोमवार को आयोजित समाधान शिविर एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गया। प्रशासन द्वारा जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान के दावे तो किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर हालात इससे बिल्कुल उलट दिखाई दिए। शिविर में पहुंचे सैकड़ों फरियादी निराश लौटे, जबकि कई लोग घंटों इंतजार करने के बावजूद अपनी शिकायत तक दर्ज नहीं करा सके। अधिकांश शिकायतकर्ता ऐसे थे जो महीनों कई मामलों में वर्षों से अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। समाधान शिविर में डीआरओ मनीष यादव ने समस्याएं सुनीं, लेकिन लोगों का कहना है कि सुनवाई तो हुई, समाधान नहीं। फरियादियों ने आरोप लगाया कि शिविर महज औपचारिकता बनकर रह गया है। कागजों में शिकायतें दर्ज हो जाती हैं, मगर कार्रवाई का इंतजार कभी खत्म नहीं होता।