करनाल। जापान में आयोजित एशियाई खेलों में जिले की निशानेबाज राइजा ढिल्लों ने महिलाओं की स्कीट शूटिंग की टीम इवेंट स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अपने नाम कर लिया है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर मिली इस ऐतिहासिक उपलब्धि के पीछे न केवल राइजा का कड़ा परिश्रम है, बल्कि उनकी मां का वह अटूट विश्वास भी है। जिसने उन्हें हर कदम पर आगे बढ़ने का हौसला दिया। राइजा ने कहा कि यह उनके करियर में पहला मौका था जब उन्होंने एशियाई खेलों जैसे प्रतिष्ठित मंच पर देश का प्रतिनिधित्व किया। पहली बार भाग लेते ही अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के भारी दबाव को पीछे छोड़ते हुए पदक हासिल करना उनकी असाधारण प्रतिभा को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि उनमी माता गुल ढिल्लों ने हमेशा से चाहती थी की वह पढ़ाई के साथ-साथ खेलों में हिस्सा ले, लेकिन उनको समझ नहीं आया कि वह किस खेल में आगे बढ़े। तब उनके पिता रविजीत सिहं ढिल्लों ने उनको निशानेबाजी करने के लिए बोलो। राइजा ने कहा कि उनके घर में पहले से ही बंदूकें थी, जिसके चलते उन्होंने स्कीट शूटिंग चुनी और अभ्यास करना शुरू किया। उन्होंने कहा कि अभ्यास करते हुए उनकी इस खेल में रुचि हो गई और उन्होंने इसमें ही अपना भविष्य बनाने का निर्णय लिया। राइजा एकल स्पर्धा में पांच अंक से रह गई थी। तो राइजा ने कहा कि प्रतियोगिता की शुरुआत से उन्होंने सटीक निशाने साधे और फाइनल दौर तक अपनी लय बनाए रखी। कड़ी प्रतिद्वंद्विता के बावजूद उन्होंने संयम नहीं खोया, लेकिन अंतिम में वह चौथे स्थान पर रहीं। जिस बात का उन्हे काफी दुख है, क्योंकि उनको यकीन था कि वह दो पदक लेकर ही वापस लाैटेगी। राइजा ने कहा कि इस प्रतियोगिता से पहले वह जूनियर चैंपियनशिप खेल कर आई थी। जिसके चलते उनका आत्मविश्वास बढ़ा था। राइजा ने अपनी इस सफलता का पूरा श्रेय अपने माता और पिता को दिया। उन्होंने कहा कि शूटिंग जैसे महंगे और मानसिक एकाग्रता वाले खेल में टिके रहना आसान नहीं था। कई बार जब प्रदर्शन में गिरावट आई या निराशा हाथ लगी, तब उनकी मां ही वह चट्टान थीं, जिन्होंने उनका आत्मविश्वास टूटने नहीं दिया। उन्होंने कहा कि मेरी मां ने हर परिस्थिति में मुझ पर भरोसा जताया। जब भी मैं मानसिक रूप से कमजोर महसूस करती थी, वे मुझे याद दिलाती थी कि मेरी सीमाएं क्या हैं। जापान की धरती पर जब मैंने पदक जीता, तो मन में सबसे पहला ख्याल मां के उस संघर्ष और हौसले का ही आया। साथ में राइजा ने कहा कि देश की युवा बेटियों और महिलाओं को खेल के क्षेत्र में आगे आना चाहिए और अपने सपनों को पूरा करने के लिए बिना झिझके कदम बढ़ाना चाहिए। उन्होंने कहा कि खेल सिर्फ पुरुषों का क्षेत्र नहीं है। सही दिशा और कड़ी मेहनत से महिलाएं किसी भी खेल में विश्व स्तर पर परचम लहरा सकती हैं। साथ में समाज और परिवारों को चाहिए कि वे अपनी बेटियों को खेल के मैदान में उतरने के लिए प्रेरित करें और शुरुआती असफलताओं से घबराने के बजाय निरंतर अभ्यास ही सफलता का मार्ग प्रशस्त करता है।