कैथल में दो दिन पहले ही जमीन की निशानदेही की एवज में पांच लाख रुपये की रिश्वत लेने का मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने जांच तेज कर दी है। इस जांच के तहत एसीबी ने पिछले दो दिन में गिरफ्तार दोनों आरोपियों से रुपयों की रिकवरी के लिए दिल्ली और यूपी में दबिश दी है। इस जांच में एसीबी को आरोपियों के बैंक खातों में लाखों रुपये होने का अंदेशा है। इसकी जांच के लिए अब एसीबी ने बैंक प्रबंधन को भी पत्र लिखा है। एसीबी का कहना है बैंक में कितनी राशि है। इसको लेकर अभी खुलासा नहीं किया जा सकता है, क्योंकि अभी इसमें और जांच करना बाकी है। इसके साथ ही एसीबी आरोपियों के मोबाइल फोन के कॉल डिटेल की जांच कर रही है। एसीबी अधिकारियों के अनुसार अगले एक सप्ताह तक रिश्वत मामले में रिकवरी को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो पाएगी। शुक्रवार को दोपहर बाद आरोपियों को कोर्ट में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। यह है पूरा मामला मंगलवार शाम के समय को भूमि अधिग्रहण विभाग पंचकूला के कानूनगो जमीन की निशानदेही देने के लिए पांच लाख की रिश्वत लेने के आरोप में काबू किया था। साथ ही दूसरे आरोपी को भी गिरफ्तार किया गया था। टीम ने उनके खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत केस दर्ज किया था। बता दें कि इस संबंध में राजकुमार ने विजिलेंस को दी शिकायत में आरोप लगाया था कि उसने सेक्टर 18 में जमीन खरीदने का इकरार नामा किया हुआ है। उसके पास मालिक की ओर से दी गई पावर आफ अटोरिनी भी है। इसे लेकर उसने जमीन की निशानदेही को लेकर पंचकूला के भूमि अधिग्रहण विभाग विभाग के कानूनगो कर्मवीर से बातचीत की। शुरुआती दौर में आरोपी कानूनगो कर्मवीर ने इसके लिए शिकायतकर्ता से 30 लाख की रिश्वत की मांग की। इस पर उन्होंने 20 लाख की राशि दे दी। बाद में आरोपी ने निशानदेही के लिए पांच लाख रुपये की देने की मांग की। आरोपी कानूनगो कर्मवीर व दलाल चरण सिंह ने भूमि की निशानदेही करने के बाद दस्तावेजों से पूर्व पांच लाख की राशि देने बारे कहा। इसके बाद एसीबी ने आरोपी कर्मबीर को पांच लाख रुपये की रिश्वत के साथ दबोच लिया। एसीबी कैथल के इंस्पेक्टर सूबे सिंह ने बताया कि दोनों आरोपियों से रुपयों की रिकवरी को लेकर कई ठिकानों पर अब तक दबिश दी गई है। इसमें यूपी और दिल्ली में छापा मारा है, लेकिन अभी तक रिकवरी नहीं हो पाई है। रिकवरी के लिए बैंक खातों की जांच के लिए रिकॉर्ड लिया जाना है। इसके लिए बैंक प्रबंधन को लिखा गया है। आशंका है कि इन आरोपियों ने लाखों रुपये अपने बैंक खाते डाल रखे है। इसके साथ मोबाइल की कॉल रिकार्ड को लेकर सीडीआर जांच शुरू की गई है।