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जींद: चालकों और क्लीनरों के लिए 42 हजार न्यूनतम वेतन और 21 हजार पेंशन मांगी

जींद। परिवहन क्षेत्र में कार्यरत चालकों और क्लीनरों के लिए 42 हजार रुपये न्यूनतम मासिक वेतन और आठ घंटे का कार्यदिवस लागू करने को लेकर ट्रांसपोर्ट वर्कर्स यूनियन हरियाणा (सीटू) ने शुक्रवार को लघु सचिवालय पर धरना देकर प्रदर्शन किया। यूनियन ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भेजकर समस्याओं के समाधान की मांग उठाई। धरने की अध्यक्षता आजाद पांचाल ने की। सीटू के जिला अध्यक्ष रमेश चंद्र और उपाध्यक्ष कपूर सिंह ने कहा कि परिवहन क्षेत्र के मजदूर दिन-रात सड़कों पर रहकर यात्रियों और माल को गंतव्य तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ट्रक चालकों को कई-कई दिन परिवार से दूर रहकर काम करना पड़ता है। इसके बावजूद उन्हें निश्चित कार्य अवधि, साप्ताहिक अवकाश, सामाजिक सुरक्षा और पेंशन जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलतीं। उन्होंने सड़क पर चालकों के साथ पुलिस और परिवहन अधिकारियों की कथित बदसलूकी तथा मारपीट की घटनाओं पर भी चिंता जताई। प्रदर्शन में राज्य सचिव प्रदीप शर्मा, ऑल ड्राइवर-मालिक यूनियन के राज्य प्रधान नरेंद्र मुआना, धर्मपाल शर्मा नगूरां, जोगिंद्र सिंह, प्रदीप बिधराना, विक्रम, अनिल पानू, देवेंद्र घोड़ेला, बलजीत मान और कर्मवीर मौजूद रहे। बॉक्स स्क्रैप नीति और बढ़ते खर्चों का किया विरोध यूनियन ने वाहन स्क्रैप नीति को अनिवार्य के बजाय स्वैच्छिक बनाने, बीमा प्रीमियम और ईंधन की बढ़ी कीमतें वापस लेने तथा भारी टोल वसूली और चालान राशि में वृद्धि पर राहत देने की मांग की। इसके अलावा मोटर वाहन अधिनियम, 2019 के संशोधनों को वापस लेने और भारतीय न्याय संहिता की धारा 106(1) व 106(2) के तहत प्रावधानों में बदलाव की मांग भी ज्ञापन में शामिल की गई। बॉक्स कल्याण बोर्ड, बीमा और विश्राम गृह की मांग यूनियन ने परिवहन मजदूरों के लिए कल्याण बोर्ड गठित करने, आसान किस्तों पर ब्याजमुक्त ऋण देने और ऑटो, ई-रिक्शा तथा टैक्सी का बीमा सरकार की ओर से करवाने की मांग की। शहरों में निर्धारित ऑटो व ई-रिक्शा स्टैंड, निःशुल्क चार्जिंग पॉइंट, सार्वजनिक पार्किंग, अलग-अलग शौचालय और विश्राम गृह बनाने की मांग भी उठाई गई। वहीं चालकों को सरकारी खर्च पर प्रशिक्षण, वाहन लाइसेंस और प्राथमिक उपचार बॉक्स उपलब्ध करवाने तथा रात में काम करने वाले चालकों के लिए आश्रय गृह बनाने की मांग की गई।

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