आज भी हम तो खाली हाथ ही लौट रहे हैं। सरकार के आदेशों का तो पता नहीं यहां तो अफसरों की कुर्सी खाली है। किराया नाम बनवाने के लिए भी काम नहीं हो रहा। तीस किलोमीटर दूर कंवारी गांव से हम छह लोग आए थे। सारा दिन तो खराब हो गया अब वापस जा रहे हैं। हम शुक्रवार को भी आए थे तब यहां के कर्मचारियों ने कहा सोमवार को आ जाना। हमारे हर एक आदमी के 100-100 रुपये किराए भाड़े के खर्च हो गए, दिन भर खराब हो गया, काम भी नहीं हुआ। यह शब्द तहसील कार्यालय में आए ग्रामीणों ने मीडिया से बातचीत में कहे।