हांसी की अनाज मंडी में थोड़ी सी बारिश ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। मंडी में खुले आसमान के नीचे पड़ा धान बारिश से भीग गया, जिससे किसानों को अपनी फसल खराब होने की चिंता सताने लगी है। मंडी में धान की आवक करीब 40 हजार क्विंटल तक पहुंच चुकी है, लेकिन खरीद और उठान की धीमी प्रक्रिया के कारण किसानों और आढ़तियों की मुश्किलें बढ़ रही हैं। मंडी में हालात ऐसे हैं कि धान नालों तक में पड़ा नजर आ रहा है। बारिश के कारण किसानों को अपनी फसल की गुणवत्ता खराब होने और उचित भाव नहीं मिलने का डर सता रहा है। किसानों का आरोप है कि धान की खरीद नहीं हो रही और निजी खरीद में भी भावों में कटौती की जा रही है। वहीं, उठान नहीं होने से मंडी में धान के ढेर लगते जा रहे हैं। मंडी प्रधान हरिकेश सिंगला ने कहा कि मंडी में धान का उठान नहीं होने से किसान परेशान हैं। समय पर उठान नहीं होने के कारण मंडी में जगह की समस्या भी बढ़ रही है और किसानों को अपनी फसल रखने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सर्व व्यापार मंडल के प्रधान बजरंग बंसल ने कहा कि मौजूदा हालात में किसान और आढ़ती दोनों परेशान हैं। बारिश से धान भीग रहा है और खरीद व उठान की उचित व्यवस्था नहीं होने से मंडी में समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि किसानों की फसल की समय पर खरीद और उठान होना जरूरी है, ताकि उन्हें आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके। मंडी में धान की आवक लगातार बढ़ रही है, लेकिन खरीद और उठान की व्यवस्था में तेजी नहीं आने से किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है। अब किसानों और आढ़तियों को इंतजार है कि संबंधित विभाग इस समस्या का समाधान कब तक करता है।