एग्रीकल्चर साइंटिस्ट बोर्ड के चेयरमैन डॉ. संजय कुमार ने कहा कि विकसित भारत 2047 के लिए हमें एग्रीकल्चर के साथ इंजीनियरिंग की भी जरूरत होगी। ब्लॉक चेन सिस्टम को विकसित करने होगा। हमें पनीर की टेस्टिंग से ही पता लग सकेगा कि वह कौन सी भैंस के दूध से बना है। भैंस की पूरी जानकारी भी देख सकेंगे। अगर पनीर खराब होने लगेगा तो उसका रंग बदल जाएगा। जिससे आम आदमी को भी पता लग सकेगा कि उसका उपयोग न करें। केंद्रीय भैंस अनुसंधान केंद्र के स्थापना दिवस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे डॉ. संजय कुमार ने मीडिया से बातचीत में कहा कि आने वाले समय में काफी चुनौतियों का सामना करना होगा।पशुओं के चारे के लिए जगह कम होती जाएगी। ऐसे में हमें पशु चारे के लिए हाइड्रोपोनिक जैसी तकनीकों को अपनाना होगा। पशुओं के लिए जोहड़ों की संख्या कम होती जाएगी। ऐसे में उसके विकल्प खोजने होंगे। पशुओं को स्वस्थ रखने के लिए साफ जोहड़ों,पोषक तत्व वाले पशु चारों की व्यवस्था करनी होगी। पशुओं के लिए अच्छे आवास की सुविधा करनी होगी। दूध उत्पादन के साथ उसकी पैकेजिंग करनी होगी। उसकी गुणवत्ता को बेहतर बनाना होगा। दूसरे देशों में अपने उत्पाद भेजने होंगे। उत्तम नस्ल का सीमन पशुओं को उपलब्ध कराना होगा। जिससे भैंसों की नस्ल को सुधारा जा सके। पिछले वर्ष सीआईआरबी ने 2.90 लाख सीमन डोज तैयार किए। जिसमें 2 लाख पशुओं के लिए निशुल्क उपलब्ध कराए गए।