फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चरखी-दादरी में जच्चा के पौष्टिक आहार के लिए विभाग कंगाल, समाजसेवी संगठन से मिल रही रोटी और दाल

नवीन दलाल Updated Wed, 30 Jul 2025 10:10 AM IST

प्रदेश सरकार ने वर्ष 2025-26 के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का बजट 10540 करोड़ किया है। दूसरी ओर, हकीकत यह है कि दादरी स्वास्थ्य विभाग के पास डिलिवरी के बाद वार्ड में भर्ती जच्चा को पौष्टिक आहार देने के लिए बजट तक नहीं है। पिछले तीन माह से यहां भर्ती होने वालीं महिलाएं समाजसेवियों की सूखी रोटी और दाल पर निर्भर हैं। बता दें कि गर्भवती महिलाओं की डिलिवरी अब मातृ-शिशु अस्पताल में कराई जाती हैं। नागरिक अस्पताल में चल रहा लेबर रूम और वहां तैनात स्टाफ भी यहीं नियुक्त किया गया है। वहीं, डिलिवरी के बाद जच्चा को दो से तीन दिन तक वार्ड में भर्ती किया जाता है और उस दौरान स्वास्थ्य विभाग की ओर से उन्हें पौष्टिक आहार देने का प्रावधान है। तीन माह पहले की बात करें तो स्वास्थ्य विभाग की ओर से पौष्टिक आहार के रूप में जच्चा को दूध व बिस्कुट के पैकेट दिए जा रहे थे, लेकिन अप्रैल के बाद से उन्हें यह भी नहीं मिल रहा। संवाददाता ने मातृ-शिशु अस्पताल पहुंचकर जब स्टाफ से इसका कारण जाना तो विभाग के पास बजट न पहुंचने की बात सामने आई। इसके बाद विभाग के अधिकारियों से बातचीत की गई तो उन्होंने भी बजट न मिलने के कारण दूध-बिस्कुट की डाइट बंद होने की बात को स्वीकार किया। मुख्यालय से कई बार मांगा बजट, हाथ फिर भी खाली स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बंद पड़ी जच्चा की डाइट दोबारा शुरू करने के लिए मुख्यालय से कई बार बजट मांगा जा चुका है, लेकिन अब तक बात नहीं बनी है। फिलहाल विभाग के हाथ खाली हैं और बजट मिलने के बाद ही फिर से दूध-बिस्कुट की डाइट शुरू हो सकेगी। - हर माह होती हैं 85 डिलिवरी सरदार झाडू सिंह चौक स्थित मातृ शिशु अस्पताल (एमसीएच) में बनाए गए लेबर रूम में प्रतिमाह लगभग 85 महिलाओं की डिलिवरी होती हैं। डिलिवरी के बाद कई जच्चा ऐसी होती हैं जिन्हें कमजोरी व अन्य कारणों से यहां भर्ती करना पड़ता है। उस दौरान उन्हें पौष्टिक आहार देने की जिम्मेदारी विभाग की है। - जच्चा की परेशानी, उन्हीं की जुबानी - मातृ--शिशु अस्पताल में दो दिन पहले ही बच्चे को जन्म दिया है, लेकिन अस्पताल की ओर से अभी तक कोई भी पौष्टिक आहार नहीं दिया गया है। समाजसेवी लोग यहां आकर मरीजों को दाल-रोटी देते हैं और उसी से काम चला रहे हैं। सुजीता देवी, जच्चा - सोमवार सांय तीन बजे मेरी डिलिवरी हुइ्र थी। इसके बाद ही शाम सात बजे खाने के लिए दाल और रोटी दी गई। यह भी समाजसेवी संस्था ने ही उपलब्ध करवाया। अभी तक अस्पताल की ओर से कोई भी पौष्टिक आहार नहीं दिया गया है। मधुबाला, जच्चा - सरकार गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक आहार लेने के लिए प्रेरित करती है जबकि खुद के आंगन में डिलिवरी के बाद जच्चा को पौष्टिक आहार देने के लिए बजट तक नहीं है। दाल-रोटी से काम नहीं चलता और इसलिए घर से ही दूध और दलिया मंगवाना पड़ रहा है। ज्योति देवी, जच्चा - रविवार को डिलिवरी हुई थी और उसके बाद से मातृ-शिशु अस्पताल में भर्ती हूं। अब तक विभाग की ओर से एक बार भी पौष्टिक आहार नहीं दिया गया है। जच्चा वार्ड में भर्ती अधिकतर महिलाएं दाल और रोटी के सहारे ही रह रही हैं। सखी देवी, जच्चा फिलहाल बजट की कमी के चलते जच्चा की डाइट बंद है। हमने मुख्यालय से बजट मांगा हुआ है, जो जल्द मिलने की संभावना है। इसके तुरंत बाद जच्चा को पहले की तरह पौष्टिक आहार देना शुरू कर देंगे। -डॉ. जितेंद्र सिंह, सीएमओ, चरखी दादरी।

Latest

विज्ञापन

Recommended

विज्ञापन
Next
एप में पढ़ें