कोरबा जिले के ग्राम दादर खुर्द के भू-विस्थापितों और ग्रामीणों ने स्थानीय जनप्रतिनिधि के भ्रामक बयानों और रोजगार में हो रहे पक्षपात को लेकर कड़ा विरोध जताया है। ग्रामीणों ने एसईसीएल मानिकपुर क्षेत्र के मुख्य महाप्रबंधक सीजीएम और जिला कलेक्टर कोरबा को ज्ञापन सौंपा है।
ग्रामीणों ने का आरोप है कि वार्ड नंबर 10 भिलाई खुर्द के पार्षद उपेन्द्र पटेल द्वारा सार्वजनिक रूप से दादर खुर्द के ग्रामीणों को भू-विस्थापित नहीं है कहा गया है, जो पूरी तरह असत्य, निराधार और उनके संघर्ष का अपमान है। ग्रामीणों का कहना है कि उनके पूर्वजों और ग्रामीणों की जमीनें एसईसीएल खदान विस्तार और औद्योगिक कार्यों के लिए अधिग्रहित की गई हैं, जिसके स्पष्ट राजस्व रिकॉर्ड मौजूद हैं। किसी भी बाहरी व्यक्ति या जनप्रतिनिधि को उनके विस्थापन की श्रेणी को खारिज करने का कोई नैतिक या कानूनी अधिकार नहीं है।
ज्ञापन में ग्रामीणों ने रोजगार में बार-बार बाधा पहुंचाने का आरोप लगाया है। बताया गया कि मानिकपुर खदान के अंतर्गत संचालित निजी ठेका कंपनियों, कोल ट्रांसपोर्टिंग और अन्य कार्यों में स्थानीय प्रभावित युवाओं को मिलने वाले रोजगार में बार-बार रोड़े अटकाए जा रहे हैं। स्थानीय युवाओं की जायज मांगों को दबाकर बाहरी लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे परिवारों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने प्रबंधन की चुप्पी पर भी सवाल उठाया है। उनका कहना है कि प्रबंधन द्वारा इन भ्रामक दावों का खंडन न करना और विस्थापितों के हक में रोजगार नीति को कड़ाई से लागू न करना प्रबंधन की मंशा पर सवाल खड़े करता है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि दादर खुर्द के भू-विस्थापितों के संबंध में स्थिति स्पष्ट की जाए और दुष्प्रचार करने वालों को चेतावनी दी जाए। खदान क्षेत्र के स्थानीय कार्यों और ठेका कंपनियों में केवल और केवल दादर खुर्द व अन्य वास्तविक विस्थापित गांवों के युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार दिया जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि रोजगार में बाधा डालना बंद नहीं किया गया तो समस्त ग्रामवासी उग्र आंदोलन और खदान कार्य बंद करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।