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धमतरी: एक ही पंडाल में साक्षात दिख रहे देश-विदेश के सात पावन शक्तिपीठ, बड़ी संख्या में पहुंच रहे श्रद्धालु

Fri, 16 Oct 2026 09:07 PM IST
धमतरी ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, धमतरी

नवरात्र पर्व के दौरान छत्तीसगढ़ के धमतरी में मां दुर्गा की भक्ति का एक अनूठा रूप देखने को मिल रहा है। शहर के जालमपुर स्थित बालवीर दुर्गा उत्सव समिति ने इस बार ऐसा पंडाल तैयार किया है। जहां श्रद्धालु एक ही स्थान पर सात अलग-अलग देशों और क्षेत्रों से जुड़े शक्तिपीठों की झांकी के दर्शन कर रहे हैं। आस्था, धार्मिक इतिहास और आकर्षक सजावट का यह संगम लोगों के बीच खासा चर्चा का विषय बना हुआ है। पंडाल की विशेषता ऐसी है कि इसे देखने के लिए शहर ही नहीं, बल्कि दूर-दराज से भी श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।

एक पंडाल में देश- विदेश की सात शक्तिपीठों की झांकी
पंडाल में प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं को शक्तिपीठों से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं और माता सती की कथा की जानकारी मिलती है। इसके लिए प्रवेश द्वार के आसपास विशेष पोस्टर लगाए गए हैं।पूरे पंडाल को गुफानुमा स्वरूप दिया गया है, जिससे भीतर पहुंचते ही एक अलग तरह का आध्यात्मिक वातावरण महसूस होता है।झांकी में सबसे पहले श्रीलंका की मां शंकरी देवी के दर्शन होते हैं। इसके बाद नेपाल की मां गुह्येश्वरी, बांग्लादेश की मां जेसोरेश्वरी, तेलंगाना की मां जोगुलम्बा, तिब्बत की मां मानसा और पाकिस्तान की मां हिंगलाज देवी की प्रतिमाएं विराजित की गई हैं। प्रत्येक शक्तिपीठ के ऊपर लगाए गए बैनर में उसके नाम, स्थान, धार्मिक महत्व और मान्यताओं का उल्लेख किया गया है, ताकि श्रद्धालु दर्शन के साथ-साथ इनके बारे में जानकारी भी प्राप्त कर सकें।

ब्रह्मांड की थीम और कमल पर विराजित मां दुर्गा
पंडाल के अंतिम हिस्से में ब्रह्मांड की थीम पर आधारित आकर्षक सजावट की गई है। यहां मां जगदंबा की भव्य प्रतिमा श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।कमल पुष्प पर हवा में खड़ी दिखाई देने वाली मां दुर्गा की प्रतिमा को विशेष कलात्मक तरीके से सजाया गया है।रोशनी और सजावट के बीच यह दृश्य श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींच रहा है।

पंडाल में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं का कहना है कि देश-विदेश में स्थित सभी शक्तिपीठों के दर्शन के लिए अलग-अलग स्थानों की यात्रा करनी पड़ती है, जिसमें काफी समय और धन खर्च होता है। ऐसे में एक ही जगह सात देवियों के दर्शन करना उनके लिए सुखद अनुभव है। पंडाल की अनूठी अवधारणा की चर्चा सोशल मीडिया और लोगों के बीच भी हो रही है।

35 वर्षों से मां की आराधना कर रही समिति
बालवीर दुर्गा उत्सव समिति, जालमपुर के सदस्यों के मुताबिक, समिति पिछले 35 वर्षों से नवरात्र के अवसर पर मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर रही है।हर साल कुछ नया और विशेष करने की कोशिश की जाती है। पिछले वर्ष छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों की आराध्य देवियों की झांकी प्रस्तुत की गई थी, जबकि इस बार सात शक्तिपीठों को एक साथ प्रदर्शित करने का निर्णय लिया गया।समिति के सदस्यों ने बताया कि इस परिकल्पना को साकार करने के लिए करीब एक वर्ष तक तैयारी की गई।अलग-अलग शक्तिपीठों से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं और उनके महत्व को समझने के बाद झांकी का स्वरूप तय किया गया।समिति का उद्देश्य है कि श्रद्धालु एक ही पंडाल में सातों देवियों के दर्शन कर सकें और उन्हें इन शक्तिपीठों के धार्मिक महत्व की जानकारी भी मिले।

धमतरी का यह पंडाल नवरात्र में केवल दर्शन का केंद्र नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था और रचनात्मकता का ऐसा संगम बन गया है, जहां एक ही स्थान पर सात शक्तिपीठों की झलक श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही है।

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