मैं बदसूरत पैदा हुआ था। गांव के लोग अक्सर मेरे चेहरे का मजाक उड़ाते थे और स्कूल में धमकाने वाले लड़के तो कभी-कभी मुझे इसके कारण पीट भी देते थे। मैं रोते हुए घर भाग
आता था, जहां मेरी मां कहती थीं, तुम बदसूरत नहीं हो, बेटा। तुम्हारे पास नाक और द...और पढ़ें
जब आप जिंदगी के भीड़-भाड़ वाले राजमार्ग पर थके-हारे, भीड़ की लहरों में धक्के खाते हुए, विवश आगे ढकेलते जा रहे हों और आपको अकस्मात एक छोटी पगडंडी रास्ते से फूटती दिखाई दे, जो परिचित हरीतिमा को गुदगुदाती हुई किसी अपरिचित ठिकाने को जा रही हो, तो मैं आपस...और पढ़ें
स्कॉटलैंड के प्रसिद्ध कवि, उपन्यासकार, नाटककार, कवि और इतिहासकार वॉल्टर स्कॉट में बेशुमार प्रतिभा थी। उन्होंने अपने अंदर की कविता के पैदा होने की वजह जो बताई वह काफी रोचक है। स्कॉट के अनुसार मेरे पिता एक वकील और मां एक डॉक्टर की पुत्री थीं। मैं अपने...और पढ़ें
महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला के जीवन से जुड़े ऐसे बहुत से किस्से हैं जो कला और साहित्य को परिभाषित करते हैं। उनका जीवन उनके नाम के अनुसार ही निराला था। जो भी निराला से मिलता वह उससे बातचीत के दौरान ही साहित्य का कोई न कोई संदेश निकाल देते थे। अपन...और पढ़ें
फ़िराक साहब आधुनिक शायरी के आख़िरी शास्त्रीय (क्लासिक) शायर थे लेकिन हैरत है कि कि प्रेम और सौंदर्य के तीव्र बोध का यह शायर अपने जानने वालों में अपनी शायरी से ज़्यादा अपनी सनक, हेकड़ी और बदमगज़ी के लिये भी जाना जाता है।
महात्मा गांधी...और पढ़ें
प्रसिद्ध गायक भूपेन हजारिका अब इस दुनिया में नहीं रहे। लेकिन उनकी आवाज अभी भी फिजा में गूंज रही हैं। उन्होंने अपना सीधा और सटीक विश्लेषण किया है। नया ज्ञानोदय के साहित्य वार्षिकी 2015 के अंक में दिनकर कुमार के एक लेख में हजारिका ने जो अपने बारे में ल...और पढ़ें
हिंदी में कबीर और सूर्यकांत त्रिपाठी निराला अवधूत की तरह थे। इन्होंने अपने काव्य के जरिए सामाजिक कुरीतियों पर खुलकर करारे प्रहार किए। उर्दू साहित्य में ठीक इसी तरह मीर और नजीर हुआ करते थे। कालांतर में हिंदी में नागार्जुन और उर्दू में इब्ने इंशा ने कब...और पढ़ें
संगीतकार खय्याम ने कवि प्रदीप के तेवर को खासकर पसंद किया था। खय्याम के अनुसार कवि प्रदीप सिर्फ गीत लिखते रहे, गाते रहे, और अपने इसी काम से इतना नाम भी कमा लिया। सबसे अच्छे ढंग से मिलते और बोलते भी रहे। पंडित प्रदीप जी एक महापुरुष थे। उनका स्वभाव संत...और पढ़ें
पेड़ नशे में झूमने लगा और बियर की ख़ाली बोतलें मुंह चिढ़ा रही थीं। रवींद्र कालिया की यह हालत तब हुई जब वह लेखक जगदीश चतुर्वेदी के साथ बियर पी रहे थे। संस्मरण 'ग़ालिब छुटी शराब' में रवींद्र कालिया इसका उल्लेख करते हुए लिखते हैं कि वास्तव में श...और पढ़ें
मुनीर का काव्य अकेलेपन की एक साहसिक झलक है। मुनीर की ही तरह मुनीर का 'अकेलापन' भी अलग ढंग का था। यह अकेलापन अद्वितीय होने की बजाय दूसरों के अकेलेपन को सम्मान और उन्हें अकेले रहने की स्वतंत्रता देने की इच्छा का फल था। अकेलेपन का यह अंदाज नया थ...और पढ़ें