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मुड़ मुड़ के देखता हूं

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अगर दिल अच्छा है, तो बदसूरती भी खूबसूरती बन जाएगी...

काव्य डेस्क

Mud Mud Ke Dekhta Hu
                                                                
                                                    मैं बदसूरत पैदा हुआ था। गांव के लोग अक्सर मेरे चेहरे का मजाक उड़ाते थे और स्कूल में धमकाने वाले लड़के तो कभी-कभी मुझे इसके कारण पीट भी देते थे। मैं रोते हुए घर भाग
आता था, जहां मेरी मां कहती थीं, तुम बदसूरत नहीं हो, बेटा। तुम्हारे पास नाक और द...और पढ़ें
6 months ago

पगडंडी, जो परिचित हरीतिमा को गुदगुदाती हुई किसी अपरिचित ठिकाने को जा रही हो

काव्य डेस्क

Mud Mud Ke Dekhta Hu
                                                                
                                                    जब आप जिंदगी के भीड़-भाड़ वाले राजमार्ग पर थके-हारे, भीड़ की लहरों में धक्के खाते हुए, विवश आगे ढकेलते जा रहे हों और आपको अकस्मात एक छोटी पगडंडी रास्ते से फूटती दिखाई दे, जो परिचित हरीतिमा को गुदगुदाती हुई किसी अपरिचित ठिकाने को जा रही हो, तो मैं आपस...और पढ़ें
                                                
6 months ago
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वॉल्टर स्कॉट: बचपन में सुनी लोरियां बनीं मेरी रचनाओं का आधार

काव्य डेस्क

Mud Mud Ke Dekhta Hu
                                                                
                                                    स्कॉटलैंड के प्रसिद्ध कवि, उपन्यासकार, नाटककार, कवि और इतिहासकार वॉल्टर स्कॉट में बेशुमार प्रतिभा थी। उन्होंने अपने अंदर की कविता के पैदा होने की वजह जो बताई वह काफी रोचक है। स्कॉट के अनुसार मेरे पिता एक वकील और मां एक डॉक्टर की पुत्री थीं। मैं अपने...और पढ़ें
                                                
6 months ago

सूर्यकांत त्रिपाठी निराला: एक-दो मुलाकात में निकल जाता था साहित्य से संदेश 

काव्य डेस्क

Mud Mud Ke Dekhta Hu
                                                                
                                                    महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला के जीवन से जुड़े ऐसे बहुत से किस्से हैं जो कला और साहित्य को परिभाषित करते हैं। उनका जीवन उनके नाम के अनुसार ही निराला था। जो भी निराला से मिलता वह उससे बातचीत के दौरान ही साहित्य का कोई न कोई संदेश निकाल देते थे। अपन...और पढ़ें
                                                
7 months ago
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विभूतिनारायण राय बताते हैं- मैंने परसाई जी को इतना नर्वस कभी नहीं देखा, फ़िराक़ से मिलने के बाद...

काव्य डेस्क

Mud Mud Ke Dekhta Hu
                                                                
                                                    फ़िराक साहब आधुनिक शायरी के आख़िरी शास्त्रीय (क्लासिक) शायर थे लेकिन हैरत है कि  कि प्रेम और सौंदर्य के तीव्र बोध का यह शायर अपने जानने वालों में अपनी शायरी से ज़्यादा अपनी सनक, हेकड़ी और बदमगज़ी के लिये भी जाना जाता है। 

महात्मा गांधी...और पढ़ें
7 months ago

मैं खुद ही गीत लिखता था, खुद ही धुन तैयार करता था, खुद ही गाता था

काव्य डेस्क

Mud Mud Ke Dekhta Hu
                                                                
                                                    प्रसिद्ध गायक भूपेन हजारिका अब इस दुनिया में नहीं रहे। लेकिन उनकी आवाज अभी भी फिजा में गूंज रही हैं। उन्होंने अपना सीधा और सटीक विश्लेषण किया है। नया ज्ञानोदय के साहित्य वार्षिकी 2015 के अंक में दिनकर कुमार के एक लेख में हजारिका ने जो अपने बारे में ल...और पढ़ें
                                                
7 months ago

शायद इसीलिए इब्ने इंशा बार-बार मीर को करते हैं याद

काव्य डेस्क

Mud Mud Ke Dekhta Hu
                                                                
                                                    हिंदी में कबीर और सूर्यकांत त्रिपाठी निराला अवधूत की तरह थे। इन्होंने अपने काव्य के जरिए सामाजिक कुरीतियों पर खुलकर करारे प्रहार किए। उर्दू साहित्य में ठीक इसी तरह मीर और नजीर हुआ करते थे। कालांतर में हिंदी में नागार्जुन और उर्दू में इब्ने इंशा ने कब...और पढ़ें
                                                
7 months ago

वह एक जैसे ही रहे न उनका लिबास बदला, न स्वभाव बदला

काव्य डेस्क

Mud Mud Ke Dekhta Hu
                                                                
                                                    संगीतकार खय्याम ने कवि प्रदीप के तेवर को खासकर पसंद किया था। खय्याम के अनुसार कवि प्रदीप सिर्फ गीत लिखते रहे, गाते रहे, और अपने इसी काम से इतना नाम भी कमा लिया। सबसे अच्छे ढंग से मिलते और बोलते भी रहे। पंडित प्रदीप जी एक महापुरुष थे। उनका स्वभाव संत...और पढ़ें
                                                
8 months ago

रवींद्र कालिया: पेड़ नशे में झूमने लगा और बियर की ख़ाली बोतलें मुंह चिढ़ा रही थीं

काव्य डेस्क

Mud Mud Ke Dekhta Hu
                                                                
                                                    पेड़ नशे में झूमने लगा और बियर की ख़ाली बोतलें मुंह चिढ़ा रही थीं। रवींद्र कालिया की यह हालत तब हुई जब वह लेखक जगदीश चतुर्वेदी के साथ बियर पी रहे थे। संस्मरण 'ग़ालिब छुटी शराब' में रवींद्र कालिया इसका उल्लेख करते हुए लिखते हैं कि वास्तव में श...और पढ़ें
                                                
8 months ago

मुनीर नियाजी: ख्वाब होते हैं देखने के लिए...उनमें जा कर मगर रहा न करो... 

काव्य डेस्क

Mud Mud Ke Dekhta Hu
                                                                
                                                    मुनीर का काव्य अकेलेपन की एक साहसिक झलक है। मुनीर की ही तरह मुनीर का 'अकेलापन' भी अलग ढंग का था। यह अकेलापन अद्वितीय होने की बजाय दूसरों के अकेलेपन को सम्मान और उन्हें अकेले रहने की स्वतंत्रता देने की इच्छा का फल था। अकेलेपन का यह अंदाज नया थ...और पढ़ें
                                                
8 months ago
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