मुड़ मुड़ के देखता हूं

656 Poems

                                                                           राहुल जी कहा करते थे 'कमर बांध लो भावी घुमक्कड़ों, संसार तुम्हारे स्वागत के लिए बेकरार है।' राहुल जी को आधुनिक हिन्दी साहित्य में यात्राकार, इतिहासविद्, तत्वान्वेषी और युग परिवर्तनकारी साहित्यकार के रूप में जाना जाता है। राहुल जी ने किशोरावस्...और पढ़ें
                                                
4 days ago
                                                                           हमारी क़ायनात में जो मक़ाम सूरज का है, फूलों में गुलाब का है, खेतों में फ़सल का है, मिटटी में उपज का है। हवा में ज़िन्दगी देने की सलाहियत का है और शायरी में मुहब्बत और दर्द का है, फ़ारसी ज़बान के शोअरा में वही मक़ाम हाफ़िज़ शीराज़ी का है।  

हाफ...और पढ़ें
1 week ago
                                                                           वाणी प्रकाशन की किताब ‘चकिया से दिल्ली’ में प्रमोद कुमार तिवारी कवि केदारनाथ सिंह को याद करते हुए लिखते हैं कि

अस्सी वर्ष का हो जाने के बावजूद गुरुवर में किसी शिशु जैसी प्रश्नाकुलता और वैसी ही मासूमियत मैंने कई बार देखी है। संगीत से उन...और पढ़ें
3 weeks ago
                                                                           साहिर लुधियानवी आज होते तो 100 बरस के होते लेकिन फ़नकार की उम्र कब होती है। वो उतना लंबा ज़िंदा होता है जितना उसका फ़न। जितनी दफ़ा आप सुनेंगे फ़िल्म प्यासा के गीत या कभी-कभी की नज़्म, साहिर ही तो कान में गूंजेंगे। बल्कि जितनी बार आप उन बोलों की तारीफ...और पढ़ें
                                                
1 month ago
                                                                           महिलाएं यानी समाज की आधी आबादी और अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा। कई बड़े विद्वानों, लेखकों व कवियों ने महिलाओं को लेकर अपने विचार सामने रखे हैं। 

औरतें प्यार करने के लिए बनी हैं, समझने के लिए नहीं - ऑस्कर वाइल्ड

नारी सदैव अजे...और पढ़ें
1 month ago
                                                                           फ़िराक साहब आधुनिक शायरी के आख़िरी शास्त्रीय (क्लासिक) शायर थे लेकिन हैरत है कि  कि प्रेम और सौंदर्य के तीव्र बोध का यह शायर अपने जानने वालों में अपनी शायरी से ज़्यादा अपनी सनक, हेकड़ी और बदमगज़ी के लिये भी जाना जाता है। 

महात्मा गांधी...और पढ़ें
1 month ago
                                                                           एक दफ़ा सफ़र में फ़िराक़ साहब के साथ एक पार्सी नौजवान मिस्टर दारूवाला भी इत्तिफ़ाक़ से उसी कम्पार्टमंट में थे। रास्ते भर दिलचस्प बातें होती रहीं। इलाहाबाद का स्टेशन आया तो फ़िराक़ साहब उतरने की तैयारी करने लगे। मिस्टर दारूवाला ने कहा कि वो उनके घर आकर उनस...और पढ़ें
                                                
1 month ago
                                                                           हम सोचते हुए मीच लेते हैं आंखें, कोई अच्छा संगीत सुनते वक़्त भी, अगर ठहर जाएं किसी वाद्य पर उंगलियां तब भी यही तो होता है। हर वो शै जो दिल से जुड़ी हो वहां ख़ुद व ख़ुद बंद हुई जाती हैं आंखें ताकि भीतक तक महसूस कर सकें। तब वो फ़नकार जिसे भौतिक रूप से...और पढ़ें
                                                
1 month ago
                                                                           प्रसिद्ध शायर निदा फ़ाज़ली ने अपने जीवन के संस्मरणों को बहुत ही बेहतर ढंग से लिखा है। आजादी के बाद का देश कैसा था, इसका वर्णन निदा फ़ाज़ली ने अपनी किताब 'दीवारों के बीच' में किया है।

किताब में निदा लिखते हैं "विभाजन के बाद देश...और पढ़ें
1 month ago
                                                                           दरियागंज की एक छोटी-सी गली में, एक छोटे-से मकान की, एक छोटी सी बैठक के छोटे-से दरवाजे में घुसते ही, एक छोटी-सी चारपाई पर एक विशाल मूर्ति को बैठे देख, मैं मंत्रमुग्ध कुछ झुका-झुका सा, बस, खड़ा-खड़ा-सा ही रह गया। मूर्ति की पीठ मेरी ओर थी। शरद जो मुझे वहा...और पढ़ें
                                                
1 month ago
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