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भूपेन हजारिका

मुड़ मुड़ के देखता हूं

मैं खुद ही गीत लिखता था, खुद ही धुन तैयार करता था, खुद ही गाता था...

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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प्रसिद्ध गायक भूपेन हजारिका अब इस दुनिया में नहीं रहे। लेकिन उनकी आवाज अभी भी फिजा में गूंज रही हैं। उन्होंने अपना सीधा और सटीक विश्लेषण किया है। नया ज्ञानोदय के साहित्य वार्षिकी 2015 के अंक में दिनकर कुमार के एक लेख में हजारिका ने जो अपने बारे में लिखा है, उसका विस्तार से उल्लेख किया गया है। हजारिका ने अपने जीवन के बारे में लिखा था- मैंने 13 साल की उम्र में 'अग्नियुगर फिरंगति' गाना लिखा था। और 10 साल की उम्र में शंकरदेव के बारे में गाना लिखा था। जब 1946 में ज्योति प्रसाद ने मेरे गाने 'अग्नियुगर फिरंगति' को अपनी फिल्म में  जगह दी तो मुझे प्रोत्साहन मिला। 
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मैंने कई गीत फिल्मों या नाटकों के किरदारों को ध्यान में रखकर लिखे थे...

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