वह एक जैसे ही रहे न उनका लिबास बदला, न स्वभाव बदला

कवि प्रदीप
                
                                                             
                            संगीतकार खय्याम ने कवि प्रदीप के तेवर को खासकर पसंद किया था। खय्याम के अनुसार कवि प्रदीप सिर्फ गीत लिखते रहे, गाते रहे, और अपने इसी काम से इतना नाम भी कमा लिया। सबसे अच्छे ढंग से मिलते और बोलते भी रहे। पंडित प्रदीप जी एक महापुरुष थे। उनका स्वभाव संत जैसा था। हिंदुस्तानी आदमी का जो रहन-सहन और स्वभाव होना चाहिए, उनकी एक मिसाल थे पंडित जी। उन्हें कितनी भी कामयाबी मिली, कितना भी नाम मिला, कितना भी पैसा मिला, वह एक जैसे ही रहे। न उनका लिबास बदला, न स्वभाव बदला। हिंदी के लेखन में जो मुकाम प्रदीप जी ने बनाया वह बहुत कम लोगों को मिल सका है। 
                                                                
                
                
                 
                                    
                     
                                             
                                                
                                             
                                                
                                                                
                                        
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साहिर साहब भी प्रदीपजी की तारीफ करते रहते थे...

4 weeks ago

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