कविता के संदर्भ में 'नीरज' ने 'दर्द दिया है' की भूमिका में कहा है- ''जब लिखने के लिए लिखा जाता है तब जो कुछ लिखा जाता है उसका नाम है गद्य। पर जब लिखे बिना न रहा जाए और जो पद लिख-लिख जाए उसका नाम है कविता। मेरे जीवन में कविता...और पढ़ें
करते हैं तन-मन से वंदन, जन-गण-मन की अभिलाषा का
अभिनंदन अपनी संस्कृति का, आराधन अपनी भाषा का।
यह अपनी शक्ति सर्जना के माथे की है चंदन रोली
माँ के आँचल की छाया में हमने जो सीखी है बोली
यह अपनी बँधी हुई अंजुरी ये अपने...और पढ़ें
भारतीय ज्ञानपीठ से प्रकाशित हिंदी गीत के प्रतिष्ठित समवेत संकलन ‘पाँच जोड़ बांसुरी’ के संपादक डा. चन्द्रदेव सिंह ने कहा है कि ‘आज का गीत न तो लोक जीवन से विमुख है और न ही नागरिक जीवन से उपेक्षित, न तो राष्ट्र की भौगोलिक सीमाओं से बद्ध है और न ही अंतर्...और पढ़ें
ऐ वतन जब भी सर-ए-दश्त कोई फूल खिला
देख कर तेरे शहीदों की निशानी रोया
- जाफ़र ताहिर
न इंतिज़ार करो इन का ऐ अज़ा-दारो
शहीद जाते हैं जन्नत को घर नहीं आते
- साबिर ज़फ़र...और पढ़ें
फ़लक को छूने की ख़्वाहिश हज़ार दिल में लिए
कि सरगिराँ है हमारी उड़ान भी हम भी
- नबील अहमद नबील...और पढ़ें
प्रेम पिता का दिखाई नहीं देता / चन्द्रकान्त देवताले
तुम्हारी निश्चल आंखें
तारों-सी चमकती हैं मेरे अकेलेपन की रात के आकाश में
प्रेम पिता का दिखाई नहीं देता
ईथर की तरह होता है
ज़रूर दिखाई देती होंगी नसीहतें...और पढ़ें
उर्दू अदब में एक से एक बेहतरीन शायर हुए हैं, लेकिन नज़ीर अपना अलग स्थान रखते हैं। नज़ीर को सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल के तौर पर देखा जाता है। उन्होंने होली से लेकर लगभग सभी हिंदू-मुस्लिम त्योहारों पर अपनी कलम चलाई। नज़ीर के शायराने मिज़ाज पर होली क...और पढ़ें
एक बोसे के तलबगार हैं हम
और मांगें तो गुनहगार हैं हम
- अज्ञात
ध्यान के रस में डूबे लब
बोसा बोसा चेहरे हैं
- मुसहफ़ इक़बाल तौसिफ़ी...और पढ़ें
काका से कहने लगे ठाकुर ठर्रा सिंग,
दाढ़ी स्त्रीलिंग है, ब्लाउज़ है पुल्लिंग।
ब्लाउज़ है पुल्लिंग, भयंकर ग़लती की है,
मर्दों के सिर पर टोपी पगड़ी रख दी है।
कह काका कवि पुरूष वर्ग की क़िस्मत खोटी,
मिसर...और पढ़ें
‘हम तो हैं परदेस में देस में निकला होगा चाँद’ में परदेश से देश की चिंता और ‘कालिदास के मेघदूत’ से महादेव को संदेश पहुँचाना साथ ही जीवन में साम्यवादी आदर्शों को अपनाना, असल मायने में भारतीयता के उस चित्र को दिखाता है जिसकी परिकल्पना सभी आदर्श पुरुषों...और पढ़ें