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काव्य चर्चा

32 Followers 3152 Poems

जन्म मिथ्या है, क्योंकि उस पर, मृत्यु का प्रश्नचिन्ह है: नीरज 

काव्य डेस्क

Kavya Charcha
                                                                
                                                    कविता के संदर्भ में 'नीरज' ने 'दर्द दिया है' की भूमिका में कहा है- ''जब लिखने के लिए लिखा जाता है तब जो कुछ लिखा जाता है उसका नाम है गद्य। पर जब लिखे बिना न रहा जाए और जो पद लिख-लिख जाए उसका नाम है कविता।  मेरे जीवन में कविता...और पढ़ें
                                                
1 year ago

Hindi Diwas 2024: 'हिंदी' भाषा पर विभिन्न कवियों की कविताओं के अंश

काव्य डेस्क

Kavya Charcha
                                                                
                                                    करते हैं तन-मन से वंदन, जन-गण-मन की अभिलाषा का
अभिनंदन अपनी संस्कृति का, आराधन अपनी भाषा का।

यह अपनी शक्ति सर्जना के माथे की है चंदन रोली
माँ के आँचल की छाया में हमने जो सीखी है बोली
यह अपनी बँधी हुई अंजुरी ये अपने...और पढ़ें
2 years ago
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इस सदी का गीत हूँ मैं गुनगुनाकर देखिए...

काव्य डेस्क

Kavya Charcha
                                                                
                                                    भारतीय ज्ञानपीठ से प्रकाशित हिंदी गीत के प्रतिष्ठित समवेत संकलन ‘पाँच जोड़ बांसुरी’ के संपादक डा. चन्द्रदेव सिंह ने कहा है कि ‘आज का गीत न तो लोक जीवन से विमुख है और न ही नागरिक जीवन से उपेक्षित, न तो राष्ट्र की भौगोलिक सीमाओं से बद्ध है और न ही अंतर्...और पढ़ें
                                                
2 years ago

Pulwama martyr: देश पर मिटने वालों के लिए शायरों के अल्फ़ाज़

काव्य डेस्क

Kavya Charcha
                                                                
                                                    ऐ वतन जब भी सर-ए-दश्त कोई फूल खिला
देख कर तेरे शहीदों की निशानी रोया
- जाफ़र ताहिर


न इंतिज़ार करो इन का ऐ अज़ा-दारो
शहीद जाते हैं जन्नत को घर नहीं आते
- साबिर ज़फ़र...और पढ़ें
2 years ago
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हौसलों की उड़ान पर कुछ चुनिंदा शेर

काव्य डेस्क

Kavya Charcha
                                                                
                                                    फ़लक को छूने की ख़्वाहिश हज़ार दिल में लिए
कि सरगिराँ है हमारी उड़ान भी हम भी
- नबील अहमद नबील...और पढ़ें
3 years ago

फादर्स डे स्पेशल - पिता के लिए लिखी गयीं कुछ सुंदर कविताएं

काव्य डेस्क

Kavya Charcha
                                                                
                                                    प्रेम पिता का दिखाई नहीं देता / चन्द्रकान्त देवताले

तुम्हारी निश्चल आंखें
तारों-सी चमकती हैं मेरे अकेलेपन की रात के आकाश में
प्रेम पिता का दिखाई नहीं देता
ईथर की तरह होता है
ज़रूर दिखाई देती होंगी नसीहतें...और पढ़ें
3 years ago

नज़ीर के शायराने मिज़ाज पर होली का रंग, पढ़िये 3 बेहतरीन कविताएं 

काव्य डेस्क

Kavya Charcha
                                                                
                                                    उर्दू अदब में एक से एक बेहतरीन शायर हुए हैं, लेकिन नज़ीर अपना अलग स्थान रखते हैं। नज़ीर को सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल के तौर पर देखा जाता है। उन्होंने होली से लेकर लगभग सभी हिंदू-मुस्लिम त्योहारों पर अपनी कलम चलाई। नज़ीर के शायराने मिज़ाज पर होली क...और पढ़ें
                                                
3 years ago

Kiss Day - 'बोसे' पर कहे गए शायरों के अल्फ़ाज़

दीपाली अग्रवाल

Urdu Adab Kavya Charcha
                                                                
                                                    एक बोसे के तलबगार हैं हम
और मांगें तो गुनहगार हैं हम
- अज्ञात


ध्यान के रस में डूबे लब
बोसा बोसा चेहरे हैं
- मुसहफ़ इक़बाल तौसिफ़ी...और पढ़ें
3 years ago

स्त्रीलिंग, पुल्लिंग : काका हाथरसी की लोटपोट कर देने वाली कविता

अमर शर्मा

Kavya Charcha Hasya
                                                                
                                                    काका से कहने लगे ठाकुर ठर्रा सिंग,
दाढ़ी स्त्रीलिंग है, ब्लाउज़ है पुल्लिंग।

ब्लाउज़ है पुल्लिंग, भयंकर ग़लती की है,
मर्दों के सिर पर टोपी पगड़ी रख दी है।

कह काका कवि पुरूष वर्ग की क़िस्मत खोटी,
मिसर...और पढ़ें
4 years ago

राही मासूम रज़ा : मेरे बिना किस हाल में होगा, कैसा होगा चाँद

संजीव कुमार झा

Kavya Charcha
                                                                
                                                    ‘हम तो हैं परदेस में देस में निकला होगा चाँद’ में परदेश से देश की चिंता और ‘कालिदास के मेघदूत’ से महादेव को संदेश पहुँचाना साथ ही जीवन में साम्यवादी आदर्शों को अपनाना, असल मायने में भारतीयता के उस चित्र को दिखाता है जिसकी परिकल्पना सभी आदर्श पुरुषों...और पढ़ें
                                                
4 years ago
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विशेष

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Aditya Mishra

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