काव्य चर्चा

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                                                                           अफ़्सोस ये वबा के दिनों की मोहब्बतें
इक दूसरे से हाथ मिलाने से भी गए
- सज्जाद बलूच

हमारी ग़म-ए-आशिक़ी गर वबा है
तो क्या फिर तिरे पास कोई दवा है
- कामरान हामिद

रहिए अहबाब से कट कर कि वबा के दिन...और पढ़ें
1 week ago
                                                                           ज़ब्त करता हूँ तो घुटता है क़फ़स में मिरा दम 
आह करता हूँ तो सय्याद ख़फ़ा होता है 
~क़मर जलालवी

दर्द-ए-दिल कितना पसंद आया उसे 
मैं ने जब की आह उस ने वाह की 
~आसी ग़ाज़ीपुरी

एक ऐसा भी वक़्त होत...और पढ़ें
1 week ago
                                                                           आज तक बनते रहे हैं जो हमारे ज़ामिन
उन से हम हाथ मिलाने से भी महरूम रहे
- जगदीश प्रकाश...और पढ़ें
1 week ago
                                                                           इश्क़ पर ज़ोर नहीं है ये वो आतिश 'ग़ालिब' 
कि लगाए न लगे और बुझाए न बने ...और पढ़ें
1 week ago
                                                                           दिनेश कुमार शुक्ल ( जन्म-8 अप्रैल, 1950)  यानि हिंदी के समकालीन कवियों में जाना-माना नाम।  दिनेश कुमार शुक्ल की अद्भुत शैली ने समकालीन कविता के साहित्यिक मानकों से समझौता किए बगैर कविता को आम लोगों के क़रीब लाने का सार्थक काम किया है। 'कथा कहो कव...और पढ़ें
                                                
1 week ago
                                                                           बशीर बद्र की नज़्मों में मोहब्बत का दर्द समाया हुआ है। उनकी शायरी का एक-एक लफ़्ज़ इसका गवाह है। बद्र साहब अपनी ग़ज़लों में मोहब्बत के इज़हार में परंपरागत प्रतीकों का इस्तेमाल कम और ज़िंदगी के अनुभवों, रूपकों और प्रतीकों का इस्तेमाल ज्यादा करते हैं।...और पढ़ें
                                                
1 week ago
                                                                           अंजलि के फूल गिरे जाते हैं
आये आवेश फिरे जाते हैं।

चरण-ध्वनि पास-दूर कहीं नहीं
साधें आराधनीय रही नहीं
उठने, उठ पड़ने की बात रही
सांसों से गीत बे-अनुपात रही

बागों में पंखनियां झूल रहीं
क...और पढ़ें
1 week ago
                                                                           जाने वो कैसे लोग थे जिन को प्यार से प्यार मिला

बिछड़ गया हर साथी दे कर पल-दो-पल का साथ
किस को फ़ुर्सत है जो थामे दीवानों का हाथ
हम को अपना साया तक अक्सर बेज़ार मिला...और पढ़ें
1 week ago
                                                                           तिरी उमीद पे ठुकरा रहा हूं दुनिया को
तुझे भी अपने पे ये ए'तिबार है कि नहीं


बन जाएंगे ज़हर पीते पीते
ये अश्क जो पीते जा रहे हो...और पढ़ें
2 weeks ago
                                                                           जितना हंगामा ज़ियादा होगा
आदमी उतना ही तन्हा होगा
- बेदिल हैदरी


वो हंगामा गुज़र जाता उधर से
मगर रस्ते में ख़ामोशी पड़ी है
- लियाक़त जाफ़री...और पढ़ें
2 weeks ago
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