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हास्य

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खालिद इरफ़ान की हास्य ग़ज़ल: मोहब्बतों में कोई तुम्हारा ये हाल कर दे तो क्या करोगे

काव्य डेस्क

Hasya
                                                                
                                                    मोहब्बतों में कोई तुम्हारा ये हाल कर दे तो क्या करोगे
बुला के घर में वो नाइन-वन-वन को काल कर दे तो क्या करोगे

ग्रीन कार्ड उस से ले रहे हो मगर नतीजा भी याद रखना
यहाँ की काली तुम्हारे चेहरे को लाल कर दे तो क्या करोगे
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1 week ago

अशोक अंजुम की हास्य ग़ज़ल: ऊपर वाले बड़े मज़े से खींच रहे है माल मियाँ!

काव्य डेस्क

Hasya
                                                                
                                                    ऊपर वाले बड़े मज़े से खींच रहे है माल मियाँ!
लेकिन हमको नहीं मयस्सर हर दिन रोटी-दाल मियाँ!

कैसा जश्न कहाँ की खुशियाँ , वो ही रोज़ रोज़ खटना
जीवन के प्रश्नों से जूझे अपना हर इक साल मियाँ !

गुण्डों ने जो पीट...और पढ़ें
2 months ago
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Hasya: काका हाथरसी की कविता- जय बोलो बेईमान की !

काव्य डेस्क

Hasya
                                                                
                                                    मन, मैला, तन ऊजरा, भाषण लच्छेदार,
ऊपर सत्याचार है, भीतर भ्रष्टाचार।
झूटों के घर पंडित बाँचें, कथा सत्य भगवान की,
जय बोलो बेईमान की !

प्रजातंत्र के पेड़ पर, कौआ करें किलोल,
टेप-रिकार्डर में भरे, चमगादड़ के बो...और पढ़ें
2 months ago

दिलावर फ़िगार का मज़ाहिया कलाम: वस्ल की रात जो महबूब कहे गुड नाईट

काव्य डेस्क

Hasya
                                                                
                                                    ज़हर बीमार को मुर्दे को दवा दी जाए
है यही रस्म तो ये रस्म उठा दी जाए

वस्ल की रात जो महबूब कहे गुड नाईट
क़ाएदा ये है कि इंग्लिश में दुआ दी जाए

आज जलसे हैं बहुत शहर में लीडर कम हैं
एहतियातन मुझे तक़रीर...और पढ़ें
3 months ago
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Hasya Poetry: शैल चतुर्वेदी की कविता- मिल गया भ्रष्टाचार

काव्य डेस्क

Hasya
                                                                
                                                    हमारे लाख मना करने पर भी
हमारे घर के चक्कर काटता हुआ
मिल गया भ्रष्टाचार
हमने डांटा : नहीं मानोगे यार
तो बोला : चलिए
आपने हमें यार तो कहा
अब आगे का काम
हम सम्भाल लेंगे
आप हमको पाल लीजिए
आप...और पढ़ें
4 months ago

Hasya: अशोक अंजुम- तुम दलबदलू यार, तुम्हारे जलवे हैं

काव्य डेस्क

Hasya
                                                                
                                                    तुम दलबदलू यार, तुम्हारे जलवे हैं
कुर्सी पर हर बार, तुम्हारे जलवे हैं

राजनीति से पहले इकदम पैदल थे
अब दर्जन-भर कार, तुम्हारे जलवे हैं

मरघिल्ले थे तुम अब सेहतमंद हुए
लोकतंत्र बीमार, तुम्हारे जलवे हैं...और पढ़ें
4 months ago

विश्व हास्य दिवस: चुनाव और पत्रकार पर काका हाथरसी की 2 चुनिंदा कविताएं

काव्य डेस्क

Hasya
                                                                
                                                    हार गए वे, लग गई इलेक्शन में चोट।
अपना अपना भाग्य है, वोटर का क्या खोट?
वोटर का क्या खोट, ज़मानत ज़ब्त हो गई।
उस दिन से ही लालाजी को ख़ब्त हो गई॥
कह ‘काका’ कवि, बर्राते हैं सोते सोते।
रोज़ रात को लें, हिचकियाँ रोते र...और पढ़ें
4 months ago

राही मासूम रज़ा: दिलों की राह पर आख़िर ग़ुबार सा क्यूँ है

काव्य डेस्क

Hasya
                                                                
                                                    दिलों की राह पर आख़िर ग़ुबार सा क्यूँ है
थका थका मिरी मंज़िल का रास्ता क्यूँ है

सवाल कर दिया तिश्ना-लबी ने साग़र से
मिरी तलब से तिरा इतना फ़ासला क्यूँ है

जो दूर दूर नहीं कोई दिल की राहों पर
तू इस मरी...और पढ़ें
6 months ago

Hasya Poetry: खालिद इरफ़ान की नज़्म- सर्च इंजन है बड़ी चीज़ कुँवारों के लिए

काव्य डेस्क

Hasya
                                                                
                                                    नेट ईजाद हुआ हिज्र के मारों के लिए
सर्च इंजन है बड़ी चीज़ कुँवारों के लिए

जिस को सदमा शब-ए-तन्हाई के अय्याम का है
ऐसे आशिक़ के लिए नेट बहुत काम का है

नेट फ़रहाद को शीरीं से मिला देता है
इश्क़ इंसान क...और पढ़ें
6 months ago

बहरों को फरियाद सुनाना, अच्छा है पर कभी-कभी: हुल्लड़ मुरादाबादी

काव्य डेस्क

Hasya
                                                                
                                                    बहरों को फरियाद सुनाना, अच्छा है पर कभी-कभी
अंधों को दर्पण दिखलाना, अच्छा है पर कभी-कभी

ऐसा न हो तेरी कोई उंगली गायब हो जाए
नेताओं से हाथ मिलाना, अच्छा है पर कभी-कभी

बीवी को बंदूक सिखाकर तुमने रिस्की काम कि...और पढ़ें
6 months ago
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