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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Agriculture: Wheat production dropped by 30 percent due to heat, procurement also boomed, farmers suffered huge losses

Agriculture: गर्मी से 30 फीसदी गिरा गेहूं का उत्पादन, खरीद भी धड़ाम, किसानों को हुआ भारी नुकसान

Wed, 18 May 2022 11:40 AM IST
Dimple Sirohi अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Wed, 18 May 2022 11:40 AM IST
सार

पिछले कई वर्षों से मेरठ जिले में गेहूं की औसत उत्पादकता करीब 44 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रही है। लेकिन इस बार इसमें 30 प्रतिशत तक की गिरावट देखने को मिली है।

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Agriculture: Wheat production dropped by 30 percent due to heat, procurement also boomed, farmers suffered huge losses
गेहूं - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

मार्च और अप्रैल में औसत से ज्यादा तापमान की मार गेहूं के उत्पादन पर पड़ी है। मेरठ जिले में गेहूं की प्रति हेक्टेयर उत्पादन 30 प्रतिशत तक घट गया है। किसानों को इससे प्रति हेक्टेयर 26 हजार रुपये का नुकसान हुआ है। वहीं सरकारी क्रय केंद्रों पर भी 31,3000 के लक्ष्य के सापेक्ष 3670 मीट्रिक टन खरीद ही हो पाई है। हालांकि इसकी एक बड़ी वजह खुले बाजार में गेहूं का भाव एमएसपी से ज्यादा होना भी है। 

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रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं की मांग बढ़ी है। वहीं घरेलू बाजार में भी गेहूं का भाव एमएसपी के मुकाबले 200 रुपये कुंतल तक ज्यादा हैं। देश में गेहूं की किल्लत न हो इसे देखते हुए सरकार ने निर्यात पर भी रोक लगा दी है। 
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पिछले कई वर्षों से मेरठ जिले में गेहूं की औसत उत्पादकता करीब 44 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रही है। इस बार असमय बढ़े तापमान की वजह से उत्पादकता 31 क्विंटल हेक्टेयर तक पहुंचने का ही अनुमान है। इस बार कृषि विभाग ने भी अभी तक गेहूं की क्राप कटिंग के आंकड़े जारी नहीं किए हैं। मेरठ मंडल में सरकारी केंद्रों पर पिछले साल 143702 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हुई थी।
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वर्ष     गेहूं की उत्पादकता (क्विंटल प्रति हेक्टेयर में)
 2016-17    43.63
 2017-18    43.65
 2018-19    46.64

ऐसे हुआ किसानों को घाटा 
गेहूं का एमएसपी 2015 रुपये प्रति क्विंटल है। इस हिसाब से प्रति हेक्टेयर 44 क्विंटल की औसत उत्पादकता पर किसानों को 88,660 रुपये की आय होती। इस बार औसत उत्पादकता करीब 31 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। इस हिसाब से किसानों को 62465 रुपये ही मिल पा रहे हैं जो 26195 रुपये प्रति हेक्टेयर कम है।

जनपद में इस साल गेहूं का रकबा करीब 80 हजार हेक्टेयर था। इस हिसाब से जनपद के किसानों को एक मोटे अनुमान के तौर पर करीब 210 करोड़ रुपये का झटका लगा है।

अब दाम भी घट रहे 
खुले बाजार में सरकारी केंद्रों से ज्यादा भाव मिल रहा था। गेहूं के निर्यात पर रोक के बाद अब जिले में दाम गिरने लगे हैं। सरकार को नुकसान की भरपाई के लिए बोनस देना चाहिए। - गांव नंगला गौसाई निवासी राम पहल और मसूरी निवासी

सरकार दे राहत
भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत और राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के अध्यक्ष सरदार वीएम सिंह ने गेहूं की उत्पादकता में भारी कमी से किसानों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए सरकार से बोनस दिए जाने की मांग की है। टिकैत ने कहा कि भाकियू इसके लिए जल्द ही जिला मुख्यालयों पर ज्ञापन देगी। 

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