विज्ञापन

भौतिक सामान बचाने में डूब रहा इंसान

Hamirpur Updated Mon, 07 May 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
हमीरपुर। संसार में आकर मनुष्य अपने साथ न जाने कितना सामान इकट्ठा कर लेता है। जाने कितनी पाप की गठरियां भी बांध लेता है। जिनको साथ लेकर जीवन जीता है। जब कभी भवसागर में डूबने का समय आता है। तब वह अपने साथ वह भौतिक सामान बचाने का प्रयास करता है। जिसे बचाने के चक्कर में खुद डूब जाता है। यही गलती आज हर इंसान कर रहा है। यह बात संत निरंकारी सत्संग भवन में महात्मा डा. सुशील कुमार ने कही।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि जिसके पास जितना ज्यादा सामान होगा। उसके उतनी जल्दी डूबने की आशंका रहती है। आदमी के पास भक्ति का सामान ज्यादा रहे। किंतु भौतिकता का सामान कम से कम रहे, तभी भव सागर से आसानी से पार हो सकता है। सत्संग करने से संतोष, दया, प्रेम, करुणा और क्षमा का भाव पैदा होता है। जबकि सांसारिक माहौल में बैर, नफरत और ईर्ष्या का भाव पैदा होता है। जो दुख और कष्ट का कारण बनकर जीवन से गुजरता है। इसलिए सुख और शांति का जीवन का जीना है तो सद्गुरु की शरण में आकर भक्ति का मार्ग अपना लेना चाहिए। सुखी जीवन बनाने का इसके अलावा कोई दूसरा रास्ता नही है।
इस मौके पर गयादीन, सरला, आरती, देशराज रचनाकर, बीके चक, रामकृपाल सिंह गौर, लालाराम विश्वकर्मा, मातारानी देवी, उर्मिला देवी आदि रहे। कार्यक्रम का संचालन जगदीश शंकर निरंकारी ने किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Disclaimer


हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।
Agree
Election
  • Downloads

Follow Us