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ट्रेन में आबोध बच्ची को छोड़ कर भाग गई मां
Bhadohi
Updated Tue, 08 May 2012 12:00 PM IST
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भदोही। देहरादून से वाराणसी जा रही जनता एक्सप्रेस में एक मां ने अपने 8 महीने के आबोध बच्चे को छोड़ कर गायब हो गई। ट्रेन के एसटू बोगी में जब दूध के लिए बच्ची ने किलकारी मारी तब साथी यात्रियों का ध्यान उसकी ओर पड़ा। बाद में छानबीन करने उसकी माता का पता नहीं चला। इसकी सूचना पर जीआरपी जंघई ने बच्ची को अपने कब्जे में लेकर वाराणसी की संस्था हेल्पलाइन को भेज दिया।
जानकारी के अनुसार एसटू बोगी में बिहार के रमाशंकर कुशवाहा भी सवार थे। उनके मुताबिक प्रतापगढ़ स्टेशन पर अचानक बच्ची की रोने की आवाज से उनका ध्यान उसकी ओर गया। तब उन्होंने सोचा कि उसकी मां शौचालय गई होगी। उन्होंने खुद भी पूरा डब्बा छान मारा लेकिन बच्ची का कोई संबंधी नहीं मिला। इस बीच ट्रेन जंघई स्टेशन पहुंची तो वहां किसी ने जीआरपी को इसकी सूचना दे दी। जिसने तत्काल पूरी ट्रेन में उस बच्ची की माता पिता की खोज की लेकिन सफलता नहीं मिली। इस पर पुलिस ने जंघई मे ही बच्ची को ट्रेन से उतार लिया। इसके बाद आवश्यक जांच पड़ताल करने के बाद पीछे आ रही सारनाथ एक्सप्रेस से उस बच्ची को वाराणसी हेल्पलाइन संस्था को भेज दिया। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर ट्रेन में बैठी महिलाओं में कड़ी प्रतिक्रिया होती दिखी। कई महिलाओं ने उस नन्हीं सी जान के मां को क्रूर मां की संज्ञा देते हुए उसे कोस रही थीं कि आखिर क्या मजबूरी रही होगी कि उसने अपने दिल के टुकड़े को इस प्रकार से अलग कर दिया।
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जानकारी के अनुसार एसटू बोगी में बिहार के रमाशंकर कुशवाहा भी सवार थे। उनके मुताबिक प्रतापगढ़ स्टेशन पर अचानक बच्ची की रोने की आवाज से उनका ध्यान उसकी ओर गया। तब उन्होंने सोचा कि उसकी मां शौचालय गई होगी। उन्होंने खुद भी पूरा डब्बा छान मारा लेकिन बच्ची का कोई संबंधी नहीं मिला। इस बीच ट्रेन जंघई स्टेशन पहुंची तो वहां किसी ने जीआरपी को इसकी सूचना दे दी। जिसने तत्काल पूरी ट्रेन में उस बच्ची की माता पिता की खोज की लेकिन सफलता नहीं मिली। इस पर पुलिस ने जंघई मे ही बच्ची को ट्रेन से उतार लिया। इसके बाद आवश्यक जांच पड़ताल करने के बाद पीछे आ रही सारनाथ एक्सप्रेस से उस बच्ची को वाराणसी हेल्पलाइन संस्था को भेज दिया। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर ट्रेन में बैठी महिलाओं में कड़ी प्रतिक्रिया होती दिखी। कई महिलाओं ने उस नन्हीं सी जान के मां को क्रूर मां की संज्ञा देते हुए उसे कोस रही थीं कि आखिर क्या मजबूरी रही होगी कि उसने अपने दिल के टुकड़े को इस प्रकार से अलग कर दिया।
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