{"_id":"62067","slug":"Bhadohi-62067-64","type":"story","status":"publish","title_hn":"जांच के लिए छह इंच नीचे की निकालें मिट्टी "}
जांच के लिए छह इंच नीचे की निकालें मिट्टी
Bhadohi
Updated Tue, 08 May 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
ज्ञानपुर। अपनी मिट्टी पहचाने अभियान के तीसरे चरण में विकास क्षेत्र के पूरे दीवान गांव में किसानों की एक गोष्ठी हुई। इसमें उप निदेशक कृषि डा. आरएस यादव ने कहा कि मिट्टी का स्वास्थ्य उत्पादकता का प्रमुख स्तंभ है।
कहा कि असंतुलित रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग से मिट्टी का स्वास्थ्य कुप्रभावित हो गया है। मिट्टी के स्वास्थ्य को भविष्य में सुरक्षित एवं संरक्षित रखने के लिए जरूरी है कि किसान संतुलित मात्रा में रासायनिक उर्वरकों के साथ-साथ जीवांश खादों का अधिकाधिक प्रयोग करें। इस समय खेती की मिट्टी पलटने वाले हल से गहरी जुताई जरूर करें जिससे गर्मी में अधिक तापक्रम की वजह से भूमि में पड़े हानिकारक कीड़े, बीमारियों के अवशेष नष्ट हो जाएं। डा. यादव ने किसानों को सुझाव दिया कि फसलों के बीजों की बुआई बीज शोधन जरूर करें। बीज शोधन से न केवल फसलों में बीज जनित रोगों से मुक्ति करें। कृषि विशेषज्ञ लालजी सिंह ने कहा कि खाद्यान्न फसलों के लिए छह इंच एवं गन्ना की फसल के लिए नौ इंच गहराई का नमूना किसानों को एकत्र करना चाहिए। मिट्टी के प्रमुख अवयव जीवांश के बारे में जानकारी दी। कहा कि एक स्वस्थ्य जमीन में 0.8 प्रतिशत जीवांश कार्बन होना जरूरी है। जीवांश खादों के अधिक प्रयोग से जीवांश कार्बन के स्तर में बढ़ोत्तरी की जा सकती है। इस अवसर नंद कुमार कुशवाहा, शिव कुमार गुप्ता, शोभनाथ, लालचंद्र प्रसाद, जड़ावती देवी, आकाश सरोज, राजेश कुमार आदि थे।
विज्ञापन
कहा कि असंतुलित रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग से मिट्टी का स्वास्थ्य कुप्रभावित हो गया है। मिट्टी के स्वास्थ्य को भविष्य में सुरक्षित एवं संरक्षित रखने के लिए जरूरी है कि किसान संतुलित मात्रा में रासायनिक उर्वरकों के साथ-साथ जीवांश खादों का अधिकाधिक प्रयोग करें। इस समय खेती की मिट्टी पलटने वाले हल से गहरी जुताई जरूर करें जिससे गर्मी में अधिक तापक्रम की वजह से भूमि में पड़े हानिकारक कीड़े, बीमारियों के अवशेष नष्ट हो जाएं। डा. यादव ने किसानों को सुझाव दिया कि फसलों के बीजों की बुआई बीज शोधन जरूर करें। बीज शोधन से न केवल फसलों में बीज जनित रोगों से मुक्ति करें। कृषि विशेषज्ञ लालजी सिंह ने कहा कि खाद्यान्न फसलों के लिए छह इंच एवं गन्ना की फसल के लिए नौ इंच गहराई का नमूना किसानों को एकत्र करना चाहिए। मिट्टी के प्रमुख अवयव जीवांश के बारे में जानकारी दी। कहा कि एक स्वस्थ्य जमीन में 0.8 प्रतिशत जीवांश कार्बन होना जरूरी है। जीवांश खादों के अधिक प्रयोग से जीवांश कार्बन के स्तर में बढ़ोत्तरी की जा सकती है। इस अवसर नंद कुमार कुशवाहा, शिव कुमार गुप्ता, शोभनाथ, लालचंद्र प्रसाद, जड़ावती देवी, आकाश सरोज, राजेश कुमार आदि थे।
विज्ञापन