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आंसू गैस के जवाब में फेंका था मिर्च का पानी
Badaun
Updated Sat, 22 Nov 2014 05:30 AM IST
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अलापुर। बाबा रामपाल के बबराला आश्रम से दो दिन पहले घर लौटी 18 महिलाओं और पुरुषों ने बाबा की गिरफ्तारी का आंखों देखा हाल बयां किया। बताया कि पुलिस ने जब अनुयाइयों पर आंसू गैस के गोले छोड़े तो हम लोगों ने भी पुलिस पर मिर्च का पानी फेंका। अनुयाई पुलिस पर तेजाब फेंकने की बात को गलत बताते हैं। बाबा के ये अनुयाई आज भी उनके प्रति आस्थावान हैं। कहते हैं, बाबा पर जो आरोप लगाए जा रहे हैं वे गलत है। आश्रम में न तो किसी को कैद करके रखा जाता और न ही किसी से दुर्व्यवहार किया जाता है।
क्षेत्र के गांव उनौला, इस्लामंगज, जगत और कुपरी में कई परिवार बाबा के अनुयाई हैं। जगत निवासी ओमबाबू अपने परिवार के साथ दो दिन पहले ही आश्रम से लौटे हैं। ओमबाबू ने बताया कि वह करीब एक साल से पिता रामदास, पत्नी और तीन बच्चों के साथ बाबा के आश्रम में रह थे। बोले, साजिश के तहत बाबा को फंसाया जा रहा है। जिस दिन पुलिस बाबा को गिरफ्तार करने आश्रम पहुंची तो पुलिस ने आश्रम के बाहर खड़े बाबा के भक्तों के साथ बर्बर बर्ताव किया। जब बाबा को इसका पता चला तो उन्होंने सभी से शांत रहने को कहा। पुलिस जबरदस्ती गेट खुलवाकर अंदर आने की कोशिश कर रही थी, जिस पर भक्तों के बीच उनका टकराव हो गया। पुलिस लगातार गेट तोड़कर घुसने का प्रयास करती रही। धीरे-धीरे स्थित बिगड़ती चली गई। बाद में पुलिस ने फायरिंग शुरू कर दी। भक्तों ने भी इसका जवाब दिया। इसी बीच पुलिस ने ऐलान किया कि वह केवल बाबा को गिरफ्तार करना चाहती है। किसी भक्त से कोई लेना-देना नहीं है। जो लोग अपने घर लौटना चाहते हैं वे गेट खोलकर बाहर आ जाएं। उनके घर जाने की व्यवस्था कर दी जाएगी। इस पर 17 नवंबर की रात करीब दो बजे तमाम भक्त गेट से बाहर निकले। ओमबाबू के साथ इस्लामगंज के सुनील और उनकी पत्नी, उनौला के नेत्रपाल, राजाराम समेत करीब डेढ़ दर्जन लोग थे।
तैयार थी महिला कमांडो की टीम
आश्रम के बाहर पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों की संख्या बढ़ती देख बाबा ने आश्रम में मौजूद युवक-युवतियों को काले रंग की ड्रेस पहनवा कर जगह-जगह तैनात कर दिया गया था। इनमें महिलाओं का एक विशेष कमांडो दस्ता बाबा के इर्द-गिर्द घेरा बनाए था। यह सब बाबा के कहने पर ही हुआ था।
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क्षेत्र के गांव उनौला, इस्लामंगज, जगत और कुपरी में कई परिवार बाबा के अनुयाई हैं। जगत निवासी ओमबाबू अपने परिवार के साथ दो दिन पहले ही आश्रम से लौटे हैं। ओमबाबू ने बताया कि वह करीब एक साल से पिता रामदास, पत्नी और तीन बच्चों के साथ बाबा के आश्रम में रह थे। बोले, साजिश के तहत बाबा को फंसाया जा रहा है। जिस दिन पुलिस बाबा को गिरफ्तार करने आश्रम पहुंची तो पुलिस ने आश्रम के बाहर खड़े बाबा के भक्तों के साथ बर्बर बर्ताव किया। जब बाबा को इसका पता चला तो उन्होंने सभी से शांत रहने को कहा। पुलिस जबरदस्ती गेट खुलवाकर अंदर आने की कोशिश कर रही थी, जिस पर भक्तों के बीच उनका टकराव हो गया। पुलिस लगातार गेट तोड़कर घुसने का प्रयास करती रही। धीरे-धीरे स्थित बिगड़ती चली गई। बाद में पुलिस ने फायरिंग शुरू कर दी। भक्तों ने भी इसका जवाब दिया। इसी बीच पुलिस ने ऐलान किया कि वह केवल बाबा को गिरफ्तार करना चाहती है। किसी भक्त से कोई लेना-देना नहीं है। जो लोग अपने घर लौटना चाहते हैं वे गेट खोलकर बाहर आ जाएं। उनके घर जाने की व्यवस्था कर दी जाएगी। इस पर 17 नवंबर की रात करीब दो बजे तमाम भक्त गेट से बाहर निकले। ओमबाबू के साथ इस्लामगंज के सुनील और उनकी पत्नी, उनौला के नेत्रपाल, राजाराम समेत करीब डेढ़ दर्जन लोग थे।
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तैयार थी महिला कमांडो की टीम
आश्रम के बाहर पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों की संख्या बढ़ती देख बाबा ने आश्रम में मौजूद युवक-युवतियों को काले रंग की ड्रेस पहनवा कर जगह-जगह तैनात कर दिया गया था। इनमें महिलाओं का एक विशेष कमांडो दस्ता बाबा के इर्द-गिर्द घेरा बनाए था। यह सब बाबा के कहने पर ही हुआ था।
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