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'आप इस तरह नहीं मर सकते': भारतीय पायलट स्मित मच्छार ने बताया, कॉकपिट में कैसे हुआ हमला और कैसे बचाई जान?

Sun, 18 Oct 2026 01:30 AM IST
निर्मल कांत पीटीआई, दुबई।
पीटीआई, दुबई। Published by: निर्मल कांत Updated Sun, 18 Oct 2026 01:30 AM IST
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‘You can't die like this’: Indian pilot Machchhar recounts cockpit attack, fight to survive in flydubai flight
कैप्टन स्मित मच्छार - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
भारतीय पायलट स्मित मच्छार को पहले लगा कि विमान की छत से कोई चीज टूटकर उनके सिर के पीछे लगी है। लेकिन कुछ ही सेकंड में उन्हें पता चल गया कि उन पर हमला हो रहा है। हमला उनके सह-पायलट ने किया था। यह घटना पिछले महीने दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान में हुई थी।
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मच्छार ने शनिवार को स्काई न्यूज अरबिया को दिए एक इंटरव्यू में इस घटना के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि कैसे एक सामान्य उड़ान अचानक जिंदगी बचाने की जंग में बदल गई। उन्होंने कहा कि उस समय उन्हें पता नहीं था कि किस चीज ने उन्हें मारा है।
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पायलट ने बताया कि उड़ान सामान्य तरीके से आगे बढ़ रही थी। सभी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी थीं। ऐसा कुछ भी नहीं था, जिससे आगे होने वाली घटना का अंदाजा लगाया जा सके। उन्होंने बताया कि वह पहली बार उस सह-पायलट के साथ उड़ान भर रहे थे। उनके मुताबिक, उड़ान शुरू होने के करीब दो घंटे बाद एक अन्य कैप्टन कॉकपिट में आया। उसे वापसी की उड़ान संचालित करनी थी। वह दोनों से मिलने आया था।
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इसी दौरान सह-पायलट ने शौचालय जाने की इच्छा जताई। वह वहां से लौट आया। इसके बाद दोनों कैप्टन कुछ मिनट तक बातचीत करते रहे। फिर सह-पायलट ने कहा कि वह नमाज पढ़ना चाहता है। उसने दूसरे कैप्टन से कॉकपिट से बाहर जाने को कहा।

मच्छार ने बताया कि शुरुआत में उन्हें इस अनुरोध में कुछ भी असामान्य नहीं लगा। उन्होंने समझाया कि पायलट अपने आराम के समय विमान का नियंत्रण दूसरे पायलट को सौंप सकते हैं। उस दौरान नमाज पढ़ने की भी अनुमति होती है।

हमला शुरू होने के समय मच्छार अपनी सीट पर बैठे थे। वह अपने कंप्यूटर पर विमान के उतरने के समय और ईंधन से जुड़ी जानकारी देख रहे थे। सह-पायलट उनके पीछे खड़ा होकर नमाज पढ़ रहा था। अचानक उनके सिर के पिछले हिस्से पर बहुत जोर से वार हुआ। 38 वर्षीय पायलट ने कहा, मेरे सिर के पीछे बहुत जोर से वार हुआ। यह बहुत तेज था और मुझे लगा कि कोई बहुत भारी चीज लगी है। 

पहले उन्हें लगा कि विमान की छत से कोई चीज टूटकर उनके सिर पर गिरी है। लेकिन कुछ ही सेकंड में उन्हें समझ आ गया कि उन पर हमला किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वार के कारण उन्हें केवल कुछ इंच तक ही दिखाई दे रहा था। बाद में डॉक्टरों ने उन्हें बताया कि हमले के कारण ऐसा हुआ था।

सबसे पहले उन्होंने खुद को आगे होने वाले हमलों से बचाने की कोशिश की। उन्होंने अपनी सीट बेल्ट खोली और हमले को रोकने की कोशिश की। इस दौरान उनके हाथ में चोट लग गई। इसके बाद उन्होंने दूसरे कैप्टन को वापस कॉकपिट में बुलाने की कोशिश की।

मच्छार ने बताया कि वह अपने साथी का नाम लेकर चिल्ला रहे थे। वह दरवाजा खोलने वाला स्विच चलाने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान वह पहली बार बेहोश हो गए। उन्हें याद है कि वह दरवाजा खोलने में कामयाब हो गए थे। लेकिन हमलावर ने धमकी दी कि वह दूसरों पर भी हमला करेगा। इसके बाद दरवाजा फिर बंद हो गया।

कुछ ही देर बाद उन्होंने विमान के इंजनों की आवाज धीमी होते सुनी। उन्हें महसूस हुआ कि विमान नीचे की ओर गोता लगा रहा है। पायलट के अपने अनुभव के कारण वह बिना उपकरणों को देखे ही इंजन की आवाज और विमान की गति में आए बदलाव को पहचान सके। उन्होंने कहा, इसके बाद घटना के दौरान मैं बार-बार बेहोश हो रहा था और फिर होश में आ रहा था। 

फ्लाइट कैप्टन ने बताया कि इसके बाद की घटनाएं उन्हें पूरी तरह याद नहीं हैं। उन्हें याद है कि उन्होंने कॉकपिट के दरवाजे तक पहुंचने की कोशिश की थी। उन्होंने कहीं अपने पैर फंसाए और खुद को आगे की ओर धकेला। इसके बाद उन्हें याद है कि दरवाजा खुला हुआ था। वह कॉकपिट और गैली यानी विमान में खाना और पेय पदार्थ रखने की जगह के बीच पड़े हुए थे।

अस्पताल के बिस्तर पर सुनाई आपबीती
यह इंटरव्यू संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के एक अस्पताल में लिया गया। उस समय मच्छार अस्पताल के बिस्तर पर बैठे थे। उन्होंने अस्पताल का गाउन पहन रखा था। उनके सिर पर पट्टी बंधी हुई थी। उन्होंने हमले के बाद अपने इलाज और ठीक होने के बारे में बताया।

एक समय ऐसा आया, जब घटना के बाद मिले सहयोग को याद करते हुए उनकी आंखें नम होती दिखाई दीं। जब उनसे पूछा गया कि घटना के बाद उन्होंने सबसे पहले किसे फोन किया था, तो वह भावुक हो गए। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने दो साल के बेटे को फोन किया था।

इंटरव्यू लेने वाले ने पूछा कि क्या उन्हें लगा था कि वह इस हमले में जिंदा नहीं बच पाएंगे। इस पर मच्छार ने कहा, एक पल ऐसा आया, जब मुझे एहसास हुआ। मैंने खुद से कहा, स्मित, कुछ करो। तुम इस तरह नहीं मर सकते।

मच्छार ने उस साथी पायलट की तारीफ की, जिसने आपात स्थिति के दौरान विमान का नियंत्रण संभाला था। उन्होंने उसके काम को सराहनीय बताया। उन्होंने कहा कि वह इस बात को जीवनभर याद रखेंगे। उस दिन से मैं एक बात हमेशा याद रखूंगा। वह है सभी का जिंदा बचने का दृढ़ संकल्प। चालक दल के सदस्य हों या यात्री, हर कोई जिंदा बचना चाहता था। 

मच्छार ने बताया कि घटना के बाद के दिनों में उन्हें बार-बार पहले वार की झलक याद आती थी। कभी-कभी इसके साथ दिल की धड़कन भी तेज हो जाती थी। उन्होंने कहा, सच कहूं तो मुझे तब लगा कि अब मैं खतरे से बाहर हूं, जब मुझे महसूस हुआ कि विमान जमीन पर उतर गया है। 

मच्छार ने बताया कि जब वह गैली में थे, तब एक डॉक्टर ने उनका इलाज किया था। उनके चालक दल के सदस्य उन्हें जागते और होश में रखने की कोशिश कर रहे थे। उस समय उनका पूरा ध्यान जिंदगी से हार न मानने पर था। 

30 सितंबर को हुई थी घटना
यह घटना 30 सितंबर को फ्लाईदुबई की उड़ान एफजेड1073 में हुई थी। बोइंग 737 विमान दुबई से तेल अवीव जा रहा था। विमान में 170 से ज्यादा लोग सवार थे। आरोप है कि ओमान के रहने वाले सह-पायलट ने कॉकपिट के अंदर आपात स्थिति में इस्तेमाल होने वाली कुल्हाड़ी से मच्छार पर हमला किया था। उसने विमान का नियंत्रण अपने हाथ में लेने की भी कोशिश की थी।

यूएई के अटॉर्नी जनरल के मुताबिक, सह-पायलट ने विमान पर कब्जा करने की योजना बनाई थी। वह इसे तेल अवीव के बेन गुरियन हवाई अड्डे के यात्री टर्मिनल से टकराना चाहता था। विमान को कथित तौर पर अगवा करने की कोशिश के मामले की जांच जारी है।

मच्छार कॉकपिट का दरवाजा खोलने में कामयाब रहे थे। इससे यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को अंदर आने का मौका मिला। उन्होंने मिलकर हमलावर को पकड़ लिया। विमान में मौजूद दूसरे पायलटों ने उसका नियंत्रण संभाला। इसके बाद विमान का रास्ता बदलकर उत्तर-पश्चिमी सऊदी अरब के तबुक शहर की ओर कर दिया गया। वहां विमान सुरक्षित उतर गया।

सह-पायलट को हिरासत में ले लिया गया। मच्छार का पहले तबुक के एक अस्पताल में इलाज किया गया। इसके बाद बेहतर इलाज के लिए उन्हें अबू धाबी भेज दिया गया। यूएई में भारतीय दूतावास ने 6 अक्तूबर को बताया था कि उनकी हालत में लगातार सुधार हो रहा है। वह धीरे-धीरे स्वस्थ हो रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मच्छर के साहस की तारीफ की थी। उन्होंने उन्हें हीरो बताया था।


सऊदी अरब और यूएई में मिले इलाज के लिए जताया आभार
इंटरव्यू में भारतीय पायलट ने सऊदी अरब और यूएई में मिले इलाज के लिए आभार जताया। उन्होंने खास तौर पर यूएई सरकार से मिले सहयोग की तारीफ की। उन्होंने कहा कि उनके साथ जिस तरह का व्यवहार किया गया, उसे वह कभी नहीं भूलेंगे।

शनिवार को यूएई के अखबार 'नेशनल' के साथ एक अलग इंटरव्यू में भी मच्छार ने इस घटना के बारे में बात की। यह इंटरव्यू भी प्रसारित किया गया था। उन्होंने बताया कि वह और विमान में सवार दूसरे लोग कैसे बच पाए। उन्होंने कहा कि उस समय उनकी प्रतिक्रिया खुद को बचाने की स्वाभाविक प्रवृत्ति के कारण थी। उन्होंने कहा, यह जिंदा बचने की स्वाभाविक प्रवृत्ति की तरह था, जो उस समय जाग गई। शुक्र है कि मेरे अंदर और विमान में सवार दूसरे यात्रियों व साथियों के अंदर भी यह प्रवृत्ति जागी।

 
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