Houthi Rebels: अमेरिकी-इस्राइली जासूसी सेल को विद्रोहियों ने किया गिरफ्तार, हूती के अधिकारी ने दी जानकारी
हूती के खुफिया प्रमुख अब्देल हकीम अल खैवानी ने सोमवार को बताया कि कथित सेल में यमन में अमेरिकी दूतावास के पूर्व कर्मचारी शामिल थे। उन्होंने कहा कि सेल ने दशकों तक दुश्मन के पक्ष में आधिकारिक और अनौपचारिक संस्थानों में जासूसी और तोड़फोड़ की है।
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इस्राइल और हमास के बीच युद्ध जारी है। इस बीच यमन के हूती विद्रोही भी काफी सक्रिय हो गए हैं। सोमवार को उन्होंने एक अमेरिकी-इस्राइली जासूसी सेल को गिरफ्तार किया है। कुछ दिन पहले ही विद्रोहियों ने संयुक्त राष्ट्र के लगभग एक दर्जन कर्मचारियों को हिरासत में लिया था। हूती के आरोपों पर अब तक इस्राइल की ओर से कोई टिप्पणी नहीं की गई है। वहीं, अमेरिकी विदेश विभाग ने भी आरोपोंं पर प्रतिक्रिया नहीं दी है।
हूती के खुफिया प्रमुख अब्देल हकीम अल खैवानी ने सोमवार को बताया कि कथित सेल में यमन में अमेरिकी दूतावास के पूर्व कर्मचारी शामिल थे। उन्होंने कहा कि सेल ने दशकों तक दुश्मन के पक्ष में आधिकारिक और अनौपचारिक संस्थानों में जासूसी और तोड़फोड़ की है। सेल के सदस्यों और अमेरिकी अधिकारियों ने तोड़फोड़ की गतिविधियों को अंजाम दिया। इसके लिए उन्होंने अमेरिकी दूतावास में अपने पदों का फायदा उठाया। अमेरिकी दूतावास के सना से जाने के बाद, सेल के सदस्यों ने अंतरराष्ट्रीय और संयुक्त राष्ट्र संगठनों की आड़ में अपने तोड़फोड़ के एजेंडे को जारी रखा।
कौन हैं और कहां से आते हैं हूती?
हूतियों का उदय 1980 के दशक में यमन में हुआ। यह यमन के उत्तरी क्षेत्र में शिया मुस्लिमों का सबसे बड़ा आदिवासी संगठन है। हूती उत्तरी यमन में सुन्नी इस्लाम की सलाफी विचारधारा के विस्तार के विरोध में हैं। 2011 से पहले जब यमन में सुन्नी नेता अब्दुल्ला सालेह की सरकार थी, तब शियाओं के दमन की कई घटनाएं सामने आईं। ऐसे में शियाओं में सुन्नी समुदाय के तानाशाह नेता के खिलाफ गुस्सा भड़क उठा। उन्होंने देखा कि अब्दुल्ला सालेह की आर्थिक नीतियों की वजह से उत्तरी क्षेत्र में असमानता बढ़ी है। वे इस आर्थिक असमानता से नाराज थे।
हूतियों को बढ़ावा देने में ईरान का नाम क्यों?
बताया जाता है कि हूती विद्रोहियों को सीधे तौर पर ईरान का समर्थन हासिल है। दरअसल, ईरान शिया बहुल देश है और हूती मुस्लिम भी इसी समुदाय से आते हैं। इसी सामुदायिक जुड़ाव के चलते ईरान पर हूतियों की मदद के आरोप लगते रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि हूतियों के पास जो हथियार और मिसाइलें मिलती हैं, वे भी ईरान द्वारा निर्मित होती है। इतना ही नहीं इस्लामिक जगत में राज के लिए ईरान का पहले ही सऊदी अरब और यूएई से लंबा विवाद रहा है। ऐसे में ईरान के लिए यमन को अरब देशों के प्रभाव में जाने से रोकना बड़ी चुनौती है। इसीलिए वह हूती विद्रोहियों का समर्थन कर यमन में सऊदी अरब और यूएई को रोकने की कोशिश में लगा है।