Xi Jinping: क्या शी जिनपिंग को चीन की कम्युनिस्ट पार्टी अब बनाएगी अपना ‘चेयरमैन’?
Xi Jinping: देंग श्योओपिंग के बाद शी ही ऐसे नेता हैं, जिनके विचारों को शी जिनपिंग थॉट के नाम से पार्टी की पथ-प्रदर्शक विचार शृंखला में जगह दी गई है। शी ने कॉमन प्रोस्परिटी (साझा समृद्धि) का खास विचार सीपीसी की विचार-शृंखला में जोड़ा है...
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अब चीन में ये चर्चा गरम हो गई है कि क्या चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) की अगली कांग्रेस (महाधिवेशन) में राष्ट्रपति शी जिनपिंग को ‘चेयरमैन’ का दर्जा दिया जाएगा। अगर ऐसा हुआ, तो उसका मतलब यह भी होगा कि सीपीसी ने शी को आजीवन महासचिव बनाने का फैसला किया है। लेकिन मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक इस प्रस्ताव पर पार्टी में गहरा विवाद है।
अब चीन में चेयरमैन का दर्जा सिर्फ कम्युनिस्ट क्रांति के पिता माने जाने माओ जेदुंग को ही दिया गया है। वे अपनी आखिरी सांस तक सीपीसी के महासचिव रहे। माओ का निधन 1976 में हुआ था। उसके बाद सीपीसी ने चेयरमैन का पद खत्म करने का फैसला किया था। उसके बाद देंग श्योओपिंग पार्टी को पार्टी का सर्वोच्च नेता माना जाता था, लेकिन उन्हें औपचारिक रूप से चेयरमैन का दर्जा नहीं मिला था। देंग के विचार पार्टी के पथ-प्रदर्शक विचार-शृंखला में जरूर शामिल रहे हैं।
देंग के बाद शी ही ऐसे नेता हैं, जिनके विचारों को शी जिनपिंग थॉट के नाम से पार्टी की पथ-प्रदर्शक विचार शृंखला में जगह दी गई है। शी ने कॉमन प्रोस्परिटी (साझा समृद्धि) का खास विचार सीपीसी की विचार-शृंखला में जोड़ा है। समझा जाता है कि इस विचार के तहत शी देंग श्याओपिंग के ‘सुधार और खुलेपन’ की नीति में बुनियादी बदलाव ला रहे हैँ।
शी अभी सीपीसी के महासचिव के अलावा चीन के राष्ट्रपति और चीन की सर्वोच्च सैनिक संस्था सेंट्रल मिलिटरी कमीशन के अध्यक्ष भी हैँ। 2016 में उन्हें पार्टी का ‘कोर’ यानी केंद्रीय शख्सियत का दर्जा दिया गया था। तब से उन्हें पार्टी के सर्वोच्च नेतृत्व में शामिल अन्य नेताओं से अधिक अधिकार संपन्न पदाधिकारी माना जाता है।
सीपीसी की 20वीं कांग्रेस 16 अक्तूबर से शुरू होगी। यह हफ्ते भर चलेगी। इस वर्ष सितंबर में हांगकांग के अखबार सिंग ताओ डेली में छपे एक लेख में यह दलील दी गई कि शी को भले चेयरमैन का दर्जा ना मिला हुआ हो, लेकिन उनसी हैसियत हर व्यावहारिक रूप में चेयरमैन जैसी हो चुकी है। उनके पास अब इतने अधिकार हैं, जितने देंग श्याओपिंग के पास भी कभी नहीं रहे। लेख में कहा गया था- ऐसे में अगर उन्हें औपचारिक रूप से चेयरमैन घोषित कर दिया जाए, तो उसमें किसी को हैरत नही होगी।
इसके अलावा भी चेयरमैन पद को बहाल करने को लेकर अटकलें लगाई जाती रही हैँ। सीपीसी से जुड़े सूत्रों ने मीडिया से कहा है कि चेयरमैन पद की बहाली के साथ-साथ संभव है कि की सर्वोच्च अधिकार प्राप्त संस्था पोलित ब्यूरो की स्थायी समिति के ढांचे में भी बदलाव हो। सिंगापुर के अखबार स्ट्रेट टाइम्स ने 2020 में ही अपनी एक रिपोर्ट में बताया था कि सीपीसी स्थायी समिति में सदस्यों की संख्या सात से घटा कर पांच या तीन करने का फैसला ले सकती है।
बीजिंग स्थित एक राजनीति-शास्त्री ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से कहा कि अगली कांग्रेस में शी को चेयरमैन का दर्जा मिलने की संभावना ज्यादा नहीं है। इसको लेकर पार्टी में समर्थन का अभाव है। इसलिए संभव है कि इस बार शी महासचिव पद पर फिर से निर्वाचन से संतुष्ट रहें और चेयरमैन पद पाने के लिए पांच साल का और इंतजार करेँ।