अंतरराष्ट्रीय सुर्खियां: फ्रांस में छात्र आक्रोश, अब बदलेंगे एडमिशन के नियम; ब्राजील चुनाव पर ट्रंप की टिप्पणी
फ्रांस सरकार ने सोमवार को घोषणा की कि वह 2028 तक अपनी राष्ट्रीय ऑनलाइन विश्वविद्यालय प्रवेश प्रणाली को बदल देगी। यह निर्णय शिक्षा और जीवन यापन की लागतों को लेकर हफ्तों से चल रहे छात्रों के विरोध प्रदर्शनों को शांत करने के लिए लिया गया है। उच्च शिक्षा मंत्री फिलिप बैप्टिस्ट ने 2027 के लिए इस मंच में "पर्याप्त बदलाव" की घोषणा की। Parcoursup नामक यह प्रणाली विश्वविद्यालयों में आवेदन संभालती है। छात्र इसकी अस्पष्ट चयन मानदंडों और पसंदीदा पाठ्यक्रमों तक असमान पहुंच की आलोचना कर रहे थे। 17 अक्तूबर को स्कूल फंडिंग और बढ़ती लागतों पर प्रदर्शनों के कारण देश में दंगे और लूटपाट हुई थी। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने छात्रों की मांगों को पूरा करने के लिए "ठोस उपायों" का वादा किया है। सरकार ने 8 अक्तूबर को 3,000 अतिरिक्त शिक्षक तैनात करने की बात भी कही थी। फ्रांस रिकॉर्ड गरीबी और सार्वजनिक ऋण से जूझ रहा है।
ब्राजील के चुनाव नतीजों पर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की टिप्पणी
ब्राजील में चुनाव नतीजों की घोषणा के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चौंकाने वाला बयान दिया है। उन्होंने कहा कि लूला की चुनावी जीत 'धांधली' वाली लग रही है। ट्रंप ने बिना किसी सबूत के यह टिप्पणी ऐसे में की है जब उनका समर्थन करने वाले प्रतिद्वंद्वी प्रत्याशी फ्लेवियो बोल्सोनारो को हार का सामना करना पड़ा।
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 2027 में संभावित चौथे कार्यकाल की तैयारी के बीच सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के अफसरों पर अविश्वास जताते हुए भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता के खिलाफ और सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं। उन्होंने भ्रष्ट अधिकारियों की तुलना बीमार पेड़ों से करते हुए कहा, इन्हें उखाड़ना या काटना जरूरी है, ताकि हटाया जा सके। इससे संकेत मिलते हैं कि शी और सख्त होंगे। शी का जोर इस बात पर है कि अधिकारी पार्टी के आदेशों का ईमानदारी से पालन करें। उन्होंने कहा, कुछ अधिकारी सामने से वफादारी दिखाते हैं, लेकिन भीतर से पार्टी नियमों और मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध नहीं हैं। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक बीजिंग में जारी है। इसमें अगले साल पार्टी महासम्मेलन की तैयारियों की दिशा तय हो सकती है।
बिना किसी शुल्क के एच-1बी को मिलने लगी मंजूरी
अमेरिकी नागरिकता और आप्रवासन सेवा (यूएससीआईएस) ने अदालतों के आदेश पर विवादास्पद 1,00,000 (लगभग 84 लाख रुपये) डॉलर की अतिरिक्त फीस के बिना ही एच-1बी वीजा याचिकाओं को मंजूर करना शुरू कर दिया है। आव्रजन विशेषज्ञों का अनुमान है कि जून से सितंबर के बीच कोर्ट की रोक के बाद करीब 15,000 से 20,000 ऐसे आवेदन कतार में थे जो फीस विवाद के कारण अधर में अटके हुए थे। इन सभी को अब सीधा फायदा होगा। यूएससीआईएस के आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026 में तिमाही-3 (अक्तूबर 2025 से जून 2026 तक) तक कुल 2.70 लाख एच-1बी वीजा याचिकाओं को मंजूरी दी जा चुकी है। स्वीकृत हुए कुल वीजा में 1.90 लाख भारतीय शामिल हैं। इस बार 1.20 लाख का चयन वहीं, वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए यूएससीआईएस के पास करीब 3,58,737 पंजीकरण प्राप्त हुए थे, जिनमें से 1,20,141 आवेदकों को चुना गया था।