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World: गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान जारी; वजीरिस्तान में गोलीबारी, पांच की मौत
Sun, 07 Jun 2026 04:11 AM IST
नितिन गौतम
पीटीआई, अमर उजाला
पीटीआई, अमर उजाला
Published by: नितिन गौतम
Updated Sun, 07 Jun 2026 04:11 AM IST
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पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में स्थानीय संगठन जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद प्रशासन ने शनिवार को उसके दर्जनों सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया। अधिकारियों ने कानून-व्यवस्था और सुरक्षा संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए शुक्रवार को संगठन को गैरकानूनी घोषित किया था। प्रशासन द्वारा जुलाई में आम चुनाव कराने की घोषणा के बीच जेएएसी ने अपनी मांगों को लेकर 9 जून को विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया था। इसके बाद सरकार ने संगठन पर प्रतिबंध लगाते हुए उसके कई नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी।
बीते साल पीओके में विरोध प्रदर्शनों के पीछे था जेएएसी
पिछले वर्ष जेएएसी और उसके विरोधी समूहों के बीच हुए प्रदर्शनों और जवाबी प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़क गई थी, जिसमें कई लोगों की मौत हुई थी और अनेक घायल हुए थे। संगठन 38 सूत्रीय मांगपत्र को लागू करने की मांग कर रहा था। इनमें सस्ती दरों पर आटा और बिजली उपलब्ध कराना तथा क्षेत्रीय विधानसभा में कश्मीरियों के लिए आरक्षित 12 सीटों को समाप्त करना शामिल था।
एक व्यक्ति की मौत की खबर
बीबीसी उर्दू की रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार को रावलाकोट में गोलीबारी की एक घटना में जेएएसी के एक सदस्य की मौत के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया। गृह विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि जेएएसी को अवैध घोषित किए जाने के बाद उससे जुड़े लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
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पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन की घोषणा के कारण क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। एहतियात के तौर पर जम्मू-कश्मीर विश्वविद्यालय और मीरपुर इंटरमीडिएट बोर्ड ने 8 जून से शुरू होने वाली परीक्षाएं स्थगित कर दी हैं। संभावित विरोध प्रदर्शन से निपटने के लिए प्रशासन ने अतिरिक्त सुरक्षा बलों की मांग की है। भारत लगातार यह कहता रहा है कि पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के भारतीय क्षेत्रों के एक हिस्से पर अवैध कब्जा कर रखा है।
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बीते साल पीओके में विरोध प्रदर्शनों के पीछे था जेएएसी
पिछले वर्ष जेएएसी और उसके विरोधी समूहों के बीच हुए प्रदर्शनों और जवाबी प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़क गई थी, जिसमें कई लोगों की मौत हुई थी और अनेक घायल हुए थे। संगठन 38 सूत्रीय मांगपत्र को लागू करने की मांग कर रहा था। इनमें सस्ती दरों पर आटा और बिजली उपलब्ध कराना तथा क्षेत्रीय विधानसभा में कश्मीरियों के लिए आरक्षित 12 सीटों को समाप्त करना शामिल था।
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एक व्यक्ति की मौत की खबर
बीबीसी उर्दू की रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार को रावलाकोट में गोलीबारी की एक घटना में जेएएसी के एक सदस्य की मौत के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया। गृह विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि जेएएसी को अवैध घोषित किए जाने के बाद उससे जुड़े लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
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पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन की घोषणा के कारण क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। एहतियात के तौर पर जम्मू-कश्मीर विश्वविद्यालय और मीरपुर इंटरमीडिएट बोर्ड ने 8 जून से शुरू होने वाली परीक्षाएं स्थगित कर दी हैं। संभावित विरोध प्रदर्शन से निपटने के लिए प्रशासन ने अतिरिक्त सुरक्षा बलों की मांग की है। भारत लगातार यह कहता रहा है कि पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के भारतीय क्षेत्रों के एक हिस्से पर अवैध कब्जा कर रखा है।
तुर्किए के विदेश मंत्री ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान से की मुलाकात
तुर्किए और बांग्लादेश के बीच बातचीत गहरी होती जा रही है। ढाका में तुर्किए के विदेश मंत्री हकन फिदान और बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने कई क्षेत्रों में आपसी सहयोग बढ़ाने के तरीके खोजने पर चर्चा की। इसके अलावा, उन्होंने कट्टरपंथी इस्लामी पार्टी जमात-ए-इस्लामी के नेताओं से भी मुलाकात की। बीएनपी के सत्ता में आने के बाद से बांग्लादेश की विदेश नीति में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। बांग्लादेश का झुकाव तुर्किए और पाकिस्तान जैसे देशों की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है।
शुक्रवार को नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी) के एक प्रतिनिधिमंडल ने भी ढाका में फिदान से मुलाकात की। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व पार्टी के संयोजक नाहिद इस्लाम कर रहे थे। मुलाकात के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया गया, 'विदेश मंत्री फिदान ने एनसीपी लीडरशिप को जुलाई रेवोल्यूशन में उनकी अहम भूमिका के लिए बधाई दी, जिसकी वजह से शेख हसीना सरकार गिरी थी।'
इसके अलावा, तुर्किए के विदेश मंत्री ने कट्टरपंथी इस्लामी पार्टी जमात-ए-इस्लामी के चीफ शफीकुर रहमान की लीडरशिप में छह लोगों के डेलीगेशन से भी मुलाकात की। जमात ने एक्स पर मीटिंग की डिटेल्स साझा करते हुए लिखा, 'बातचीत आपसी फायदे के अलग-अलग मुद्दों पर फोकस रही, जिसमें उद्योग, व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधा और रक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने शामिल है।'
शुक्रवार को नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी) के एक प्रतिनिधिमंडल ने भी ढाका में फिदान से मुलाकात की। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व पार्टी के संयोजक नाहिद इस्लाम कर रहे थे। मुलाकात के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया गया, 'विदेश मंत्री फिदान ने एनसीपी लीडरशिप को जुलाई रेवोल्यूशन में उनकी अहम भूमिका के लिए बधाई दी, जिसकी वजह से शेख हसीना सरकार गिरी थी।'
इसके अलावा, तुर्किए के विदेश मंत्री ने कट्टरपंथी इस्लामी पार्टी जमात-ए-इस्लामी के चीफ शफीकुर रहमान की लीडरशिप में छह लोगों के डेलीगेशन से भी मुलाकात की। जमात ने एक्स पर मीटिंग की डिटेल्स साझा करते हुए लिखा, 'बातचीत आपसी फायदे के अलग-अलग मुद्दों पर फोकस रही, जिसमें उद्योग, व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधा और रक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने शामिल है।'
गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान जारी
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र में रविवार को तथाकथित विधानसभा चुनाव के लिए मतदान जारी है। मतदान सुबह 8 बजे शुरू हुआ और शाम 5 बजे तक चलेगा। भारत ने इन चुनावों का कड़ा विरोध किया है। भारत का कहना है कि गिलगित-बाल्टिस्तान जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का अभिन्न हिस्सा है, जिस पर पाकिस्तान ने अवैध और जबरन कब्जा कर रखा है। भारत ने दोहराया कि 1947 में जम्मू-कश्मीर के भारत में विधिवत विलय के बाद पूरा क्षेत्र भारत का हिस्सा है। चुनाव के लिए क्षेत्र में कुल 1,391 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। इनमें 488 सामान्य, 349 संवेदनशील और 551 अति संवेदनशील श्रेणी में रखे गए हैं। तथाकथित विधानसभा में कुल 33 सीटें हैं। इनमें 24 सीटों पर सीधे चुनाव होते हैं, जबकि 8 सीटें महिलाओं, तकनीकी विशेषज्ञों और पेशेवरों के लिए आरक्षित हैं। पिछले चुनावों में आमतौर पर इस्लामाबाद में सत्ता में रहने वाली पार्टी को जीत मिलती रही है।
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र में रविवार को तथाकथित विधानसभा चुनाव के लिए मतदान जारी है। मतदान सुबह 8 बजे शुरू हुआ और शाम 5 बजे तक चलेगा। भारत ने इन चुनावों का कड़ा विरोध किया है। भारत का कहना है कि गिलगित-बाल्टिस्तान जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का अभिन्न हिस्सा है, जिस पर पाकिस्तान ने अवैध और जबरन कब्जा कर रखा है। भारत ने दोहराया कि 1947 में जम्मू-कश्मीर के भारत में विधिवत विलय के बाद पूरा क्षेत्र भारत का हिस्सा है। चुनाव के लिए क्षेत्र में कुल 1,391 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। इनमें 488 सामान्य, 349 संवेदनशील और 551 अति संवेदनशील श्रेणी में रखे गए हैं। तथाकथित विधानसभा में कुल 33 सीटें हैं। इनमें 24 सीटों पर सीधे चुनाव होते हैं, जबकि 8 सीटें महिलाओं, तकनीकी विशेषज्ञों और पेशेवरों के लिए आरक्षित हैं। पिछले चुनावों में आमतौर पर इस्लामाबाद में सत्ता में रहने वाली पार्टी को जीत मिलती रही है।
उत्तर-पश्चिमी पाकिस्तान में प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच गोलीबारी में पांच लोग मारे गए
पेशावर पुलिस ने रविवार को बताया कि उत्तर-पश्चिमी पाकिस्तान में जमीन विवाद को लेकर प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच हुई गोलीबारी में कम से कम पांच लोग मारे गए और दो घायल हो गए। यह घटना शनिवार को खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के दक्षिण वजीरिस्तान में तोई खुला पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में आने वाले गुल कच इलाके में हुई। पीड़ित सुलेमान खेल जनजाति के थे। पुलिस ने बताया कि घायलों को प्राथमिक चिकित्सा सहायता प्रदान की गई और आगे के इलाज के लिए उन्हें वाना ले जाया गया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि कानूनी कार्यवाही शुरू कर दी गई है और हत्याओं के लिए जिम्मेदार लोगों को न्याय के कटघरे में लाने का आश्वासन दिया है।
पेशावर पुलिस ने रविवार को बताया कि उत्तर-पश्चिमी पाकिस्तान में जमीन विवाद को लेकर प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच हुई गोलीबारी में कम से कम पांच लोग मारे गए और दो घायल हो गए। यह घटना शनिवार को खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के दक्षिण वजीरिस्तान में तोई खुला पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में आने वाले गुल कच इलाके में हुई। पीड़ित सुलेमान खेल जनजाति के थे। पुलिस ने बताया कि घायलों को प्राथमिक चिकित्सा सहायता प्रदान की गई और आगे के इलाज के लिए उन्हें वाना ले जाया गया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि कानूनी कार्यवाही शुरू कर दी गई है और हत्याओं के लिए जिम्मेदार लोगों को न्याय के कटघरे में लाने का आश्वासन दिया है।
इस्राइल में गोलीबारी से हड़कंप, एक की मौत और कई घायल
इस्राइल के केंद्रीय इलाके कोचाव याइर के पास हुई गोलीबारी की घटना ने पूरे देश में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इस हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि पांच लोग घायल बताए जा रहे हैं, जिनमें एक की हालत गंभीर है। इस्राइली आपातकालीन सेवा मैगन डेविड एडोम के अनुसार, घायलों का इलाज पास के अलग-अलग स्थानों पर किया जा रहा है। कुछ पीड़ितों को टजूर यित्जहाक और टजूर नतान के पास पाया गया, जहां एक व्यक्ति बेहोशी की हालत में भी था।
घटना के बाद सुरक्षा बलों ने इलाके को घेर लिया और व्यापक तलाशी अभियान शुरू किया। सेना और पुलिस के अनुसार, हमलावरों ने एक से अधिक स्थानों पर हमला किया, जिससे इलाके में दहशत फैल गई। बाद में सुरक्षा बलों ने संदिग्ध आतंकियों का पता लगाकर कार्रवाई की। इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हमले के तुरंत बाद स्थिति की समीक्षा की और पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए रखने के निर्देश दिए। प्रधानमंत्री कार्यालय ने पुष्टि की कि वे सुरक्षा एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क में हैं।
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि हमले में शामिल संदिग्धों में से एक को मौके पर ही निष्क्रिय कर दिया गया, जबकि दूसरे को बाद में मुठभेड़ में मार गिराया गया। सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, हमलावरों ने एक वाहन का उपयोग किया था, जो कथित तौर पर इस्राइली नंबर प्लेट वाला था।
सेना ने बताया कि हमले के बाद आसपास के फिलिस्तीनी गांवों को घेर लिया गया है और वेस्ट बैंक सीमा क्षेत्र के पास स्थित क्रॉसिंग को भी बंद कर दिया गया है। पूरे इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं और तलाशी अभियान जारी है।
इस्राइल के केंद्रीय इलाके कोचाव याइर के पास हुई गोलीबारी की घटना ने पूरे देश में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इस हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि पांच लोग घायल बताए जा रहे हैं, जिनमें एक की हालत गंभीर है। इस्राइली आपातकालीन सेवा मैगन डेविड एडोम के अनुसार, घायलों का इलाज पास के अलग-अलग स्थानों पर किया जा रहा है। कुछ पीड़ितों को टजूर यित्जहाक और टजूर नतान के पास पाया गया, जहां एक व्यक्ति बेहोशी की हालत में भी था।
घटना के बाद सुरक्षा बलों ने इलाके को घेर लिया और व्यापक तलाशी अभियान शुरू किया। सेना और पुलिस के अनुसार, हमलावरों ने एक से अधिक स्थानों पर हमला किया, जिससे इलाके में दहशत फैल गई। बाद में सुरक्षा बलों ने संदिग्ध आतंकियों का पता लगाकर कार्रवाई की। इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हमले के तुरंत बाद स्थिति की समीक्षा की और पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए रखने के निर्देश दिए। प्रधानमंत्री कार्यालय ने पुष्टि की कि वे सुरक्षा एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क में हैं।
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि हमले में शामिल संदिग्धों में से एक को मौके पर ही निष्क्रिय कर दिया गया, जबकि दूसरे को बाद में मुठभेड़ में मार गिराया गया। सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, हमलावरों ने एक वाहन का उपयोग किया था, जो कथित तौर पर इस्राइली नंबर प्लेट वाला था।
सेना ने बताया कि हमले के बाद आसपास के फिलिस्तीनी गांवों को घेर लिया गया है और वेस्ट बैंक सीमा क्षेत्र के पास स्थित क्रॉसिंग को भी बंद कर दिया गया है। पूरे इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं और तलाशी अभियान जारी है।