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डब्ल्यूएचओ की चेतावनी खुले में कीटाणुनाशक के छिड़काव से हो सकता है स्वास्थ्य का खतरा
Sun, 17 May 2020 10:36 AM IST
Sneha Baluni
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जेनेवा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जेनेवा
Published by: Sneha Baluni
Updated Sun, 17 May 2020 10:36 AM IST
सार
- डब्ल्यूएचओ का कहना है कि खुले में कीटाणुनाशक छिड़कने से कोरोना वायरस नहीं मरता है।
- संगठन का कहना है कि किसी भी व्यक्ति पर डिसइन्फेक्टेंट का स्प्रे नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे शारीरिक और मानसिक नुकसान हो सकते हैं।
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दवा का छिड़काव करता दमकल कर्मी (फाइल फोटो)
- फोटो : PTI
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विस्तार
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने चेतावनी दी है कि खुले में कीटाणुनाशक (डिसइन्फेक्टेंट) छिड़कने से कोरोना वायरस नहीं मरता है। ऐसा करना लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है। डब्ल्यूएचओ का कहना है कि गलियों और बाजारों में डिसइन्फेक्टेंट स्प्रे या फ्यूमिगेशन करने से इसलिए फायदा नहीं होता है क्योंकि धूल और गंदगी की वजह से वह निष्क्रिय हो जाते हैं।
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संगठन ने कहा कि ऐसा भी जरूरी नहीं है कि स्प्रे से सभी सतह कवर हो जाए और इसका असर उतनी देर रह सके जितना कि रोगाणु के लिए जरूरी होता है। किसी व्यक्ति पर सीधे स्प्रे करने से गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। संगठन का कहना है कि किसी भी व्यक्ति पर डिसइन्फेक्टेंट का स्प्रे नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे शारीरिक और मानसिक नुकसान हो सकते हैं।
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वहीं ऐसा करने से संक्रमित व्यक्ति के जरिए वायरस फैलने के खतरे को कम नहीं किया जा सकता है। क्लोरीन और दूसरे जहरीले केमिकल से लोगों को आंखों और स्किन से संबंधित परेशानियां का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा सांस लेने में दिक्कत और पेट-आंत से संबंधित बीमारियां होने का खतरा भी हो सकता है।
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डब्ल्यूएचओ का कहना है कि इनडोर क्षेत्र में भी स्प्रे और फ्यूमिगेशन सीधे नहीं करना चाहिए। इसमें कपड़े या वाइप को भिगोकर सफाई करनी चाहिए। कोरोना वायरस अलग-अलग वस्तुओं की सतह पर हो सकता है। हालांकि यह किस सतह पर कितनी देर टिकता है इसकी कोई सटीक जानकारी नहीं है।