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क्या अफगानिस्तान को तालिबान का अड्डा बना कर जाएंगे ट्रंप? पद छोड़ने से पहले जल्दबाजी में ले रहे हैं कई फैसले
Wed, 18 Nov 2020 01:53 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Wed, 18 Nov 2020 01:53 PM IST
सार
- अगले चार साल फिर बने रहने के दावे के बीच ट्रंप ले रहे हैं कई अहम फैसले
- अफगानिस्तान और इराक से 15 जनवरी तक वापस बुलाएंगे अमेरिकी सैनिक
- ट्रंप ने रक्षा मंत्रालय में किए बड़े बदलाव, रक्षा मंत्री मार्क एस्पर को किया बर्खास्त
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तालिबान
- फोटो : पीटीआई (फाइल)
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विस्तार
अफगानिस्तान से सैनिकों की वापसी के सवाल पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद अपनी पार्टी के भीतर आलोचनाओं के शिकार बन गए हैं। सीनेट में ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के नेता मिच मैकॉनेल ने इस फैसले को गलत बताया। मैकॉनेल ट्रंप के समर्थक हैं और आम तौर पर ट्रंप के बचाव में वे खड़े होते रहे हैं। लेकिन अफगानिस्तान से फौजियों की वापसी के सवाल पर उन्होंने राष्ट्रपति को आगाह किया कि ह्वाइट हाउस से विदा होने के पहले वे रक्षा और विदेश नीति में कोई बुनियादी बदलाव ना करें।
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अमेरिका के कार्यवाहक रक्षा मंत्री क्रिस्टोफर मिलर ने मंगलवार को एलान किया कि अमेरिका 15 जनवरी 2021 तक अफगानिस्तान से अपने ढाई हजार सैनिकों को वापस बुला लेगा। उसके सिर्फ पांच दिन बाद ट्रंप को राष्ट्रपति पद निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन को सौंपना होगा।
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लेकिन ट्रंप ने अभी तक हार नहीं मानी है। वे लगातार दावा कर रहे हैं कि चूंकि चुनाव में उनकी ही जीत हुई है, इसलिए अगले चार साल वही राष्ट्रपति रहेंगे। अपने इसी दावे के तहत वे बड़े प्रशासनिक और नीतिगत फैसले ले रहे हैं। अफगानिस्तान से फौज की वापसी भी इन्हीं फैसलों में एक है।
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मिलर ने बताया कि अभी अफगानिस्तान में अमेरिका के करीब 4,500 सैनिक हैं। इराक में अमेरिका में 3000 सैनिक हैं। अगले 15 जनवरी तक इराक से भी ढाई हजार सैनिकों को अमेरिका वापस बुलाएगा। मिलर की घोषणा के बाद अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट ओ ब्रायन ने पेंटागन (अमेरिकी रक्षा मंत्रालय) में सैनिक वापसी के मुद्दे पर विचार-विमर्श किया।
डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसदों ने इस फैसले की कड़ी आलोचना की है। सीनेट में रक्षा मंत्रालय से संबंधित समिति के सदस्य जैक रीड ने कहा कि हर काम को करने का सही और गलत तरीका होता है। राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बार फिर गलत तरीका चुना है। उन्होंने कहा कि हम अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा और अपने सहयोगी देशों के साथ अपने संबंधों को ट्रंप के चोटिल अहंकार की बलि नहीं चढ़ा सकते।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों की सलाह सुनने के बजाय ट्रंप चुनाव में हार से हुई हताशा का इजहार कर रहे हैं। इस फैसले से अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों की हिफाजत खतरे में पड़ेगी। तालिबान और आतंकवादी नेटवर्कों को इसका फायदा मिलेगा। इससे उन लोगों का मनोबल बढ़ेगा, जो ईरान के साथ टकराव बढ़ाना चाहते हैं।
रिपब्लिकन पार्टी के हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव के सदस्य मैक थॉर्नबरी ने फैसले को गलत बताते हुए कहा कि इससे अफगानिस्तान में लड़ाई खत्म करने के लिए अभी चल रही बातचीत में अमेरिकी पक्ष कमजोर होगा। सीनेट की खुफिया मामलों की समिति के सदस्य बेन सैसे ने कहा कि ये फैसला जमीनी हकीकत के मुताबिक नहीं है। इससे दुनिया और खतरनाक जगह बन जाएगी।
यूरोप में भी इस फैसले से नाराजगी है। उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के महासचिव जेन स्टोलेनबर्ग ने कहा कि जल्दबाजी में और बिना तालमेल बनाए फौज वापसी की बहुत बड़ी कीमत चुकानी होगी। उन्होंने कहा कि फौज वापसी के बाद अफगानिस्तान एक बार फिर से अंतरराष्ट्रीय आंतकवादियों के लिए संगठित हमले करने का रास्ता खुल जाएगा।
चुनाव हारने के बाद से राष्ट्रपति ट्रंप ने रक्षा मंत्रालय में बड़े बदलाव किए हैं। उन्होंने रक्षा मंत्री मार्क एस्पर को बर्खास्त कर दिया और उसके बाद अहम पदों पर अपने खास वफादारों को भर दिया। टीवी चैनल सीएनएन के मुताबिक एस्पर को हटाने के पीछे एक वजह यह भी थी कि वे अफगानिस्तान से जल्दबाजी में फौज वापस बुलाने का विरोध कर रहे थे।