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बाइडन का ‘स्वागत’ कैसे करेंगे किम जोंग उन? पूरे पूर्वी एशिया में कयासों का दौर
Sat, 28 Nov 2020 07:59 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सिओल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सिओल
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Sat, 28 Nov 2020 07:59 PM IST
सार
किम जोंग उन अब दुनिया के बचे-खुचे नेताओं में हैं, जिन्होंने अभी तक बाइडन को जीत की बधाई नहीं दी है। किम के डोनाल्ड ट्रंप से बेहतर संबंध रहे। ट्रंप ने उनसे मुलाकात की। ट्रंप उनकी तारीफ भी करते रहे...
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डोनाल्ड ट्रंप-किम जोंग उन (फाइल फोटो)
- फोटो : PTI
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विस्तार
उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन का अमेरिका के निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रति क्या रुख होगा, इसको लेकर पूरे पूर्वी एशिया में जबरदस्त कयास लगाए जा रहे हैं। पड़ोसी देशों में अंदेशा है कि एक बार फिर अमेरिका और उत्तर कोरिया का तनाव बढ़ सकता है, जिसका असर पास-पड़ोस के देशों पर पड़ेगा।
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ये बात फिर चर्चा में है कि अमेरिका के पिछले दो राष्ट्रपतियों के पद ग्रहण के मौके पर उत्तर कोरिया ने मिसाइल या परमाणु बम परीक्षण किया था। जानकारों का कहना है कि किम फिर कुछ वैसा ही कर सकते हैं। जो बाइडन के प्रति उनका रुख हाल में जाहिर हो गया, जब उन्होंने निर्वाचित अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए अपशब्द का इस्तेमाल किया। उन्होंने बाइडन को ‘रैबिड डॉग’ कह डाला।
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किम जोंग उन अब दुनिया के बचे-खुचे नेताओं में हैं, जिन्होंने अभी तक बाइडन को जीत की बधाई नहीं दी है। गौरतलब है कि किम के डोनाल्ड ट्रंप से बेहतर संबंध रहे। ट्रंप ने उनसे मुलाकात की। ट्रंप उनकी तारीफ भी करते रहे। इससे किम की हैसियत दुनिया में बढ़ी। इसलिए ट्रंप की हार पर उनका दुखी होना लाजिमी माना जा रहा है।
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अब संभावना यह है कि अमेरिका और उत्तर कोरिया के रिश्ते फिर से बराक ओबामा के दौर जैसे हो सकते हैं। बराक ओबामा ने उत्तर कोरिया की भड़काऊ कार्रवाइयों को अहमियत ना देने की नीति अपनाई थी। लेकिन उस समय अमेरिका ने उत्तर कोरिया पर दबाव बनाए रखा था। ट्रंप के समय इसमें ढील मिली। इसका फायदा उठाकर किम सरकार ने अपनी परमाणु हथियार क्षमता बढ़ा ली है। जानकारों का कहना है कि अब मिसाइल के जरिए अमेरिका तक आक्रमण करने की क्षमता उसके पास है।
सीआईए में काम कर चुके पॉलिसी एनालिस्ट सू किम ने जापान के एक अखबार से कहा- अमेरिका में राष्ट्रपति चाहे जो रहे, उत्तर कोरिया उसके प्रति अपना रुख बदलेगा, इसकी संभावना नहीं है। उसके परमाणु हथियार कायम रहेंगे। बल्कि किम इन हथियारों को बनाने और उनका निर्यात करने की नीति जारी रखेंगे। उत्तर कोरिया के नजरिए से यह नीति अब तक कामयाब रही है।
बराक ओबामा के 2009 में राष्ट्रपति बनने के कुछ ही महीनों के बाद उत्तर कोरिया ने लंबी दूरी के रॉकेट का परीक्षण किया था। ट्रंप जब राष्ट्रपति बने तो उत्तर कोरिया ने कई बैलिस्टिक मिसाइल दागे। नवंबर 2017 में उसने इंटर-कॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया। विशेषज्ञों का कहना है कि ये मिसाइल अमेरिका के किसी भी हिस्से में परमाणु बम से मार करने में सक्षम है। जंगी हथियारों के विशेषज्ञ मेलिसा हनहम ने एक अखबार से कहा- अब उत्तर कोरिया एक नया इंटर-कॉन्टिनेंटल मिसाइल के परीक्षण की तैयारी में है। ये मिसाइल अमेरिका के लिए नई चिंताएं पैदा कर सकती है।
उत्तर कोरिया परमाणु हथियारों को अपनी सुरक्षा की गारंटी मानता है। उसकी सोच है कि जब तक ये हथियार उसके पास हैं, अमेरिका उस पर हमला नहीं बोल सकता। इसलिए उसने ट्रंप प्रशासन की परमाणु हथियारों को स्थायी रूप से खत्म करने की मांग नहीं मानी थी। जबकि ट्रंप ने इसके बदले उत्तर कोरिया कई लाभ पहुंचाने का वादा किया था। अब जानकारों की राय है कि उत्तर कोरिया के परमाणु हथियारों को खत्म कराने के लिए बाइडन प्रशासन उससे बातचीत के रास्ते खुले रखेगा, लेकिन उसका रुख सख्त होगा।
बाइडन ने चुनाव प्रचार के दौरान किम उन जोंग को ठग कहा था। लेकिन उन्होंने यह कहा था कि अगर उत्तर कोरिया अपने परमाणु हथियारों के भंडार में कटौती करे, तो वे किम से मिलने को तैयार हो सकते हैं।
बाइडन ने एंथनी ब्लिंकेन को अपने विदेश मंत्री के बतौर चुना है। ब्लिंकेन ने कहा है कि ट्रंप की निजी संपर्क की कूटनीति नाकाम रही। उन्होंने कहा है कि उत्तर कोरिया को निरस्त्रीकरण की राह पर लाने के लिए वे बहुपक्षीय पहल की राह अपनाएंगे। इन बातों पर किम की प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है। लेकिन ये अनुमान लगाया जा रहा है कि नए साल के मौके पर दिए जाने वाले अपने संदेश में वे बाइडन प्रशासन के बारे में अपनी राय बताएंगे।
उत्तर कोरिया की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी का अधिवेशन लगभग उसी समय होगा, जब बाइडन राष्ट्रपति पद संभालेंगे। इस अधिवेशन में उत्तर कोरिया की अगली पंचवर्षीय योजना को मंजूरी दी जाएगी।