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समुद्र में एआई बढ़ाएगा सुरक्षा या खतरा?: यूएन से जयशंकर ने दुनिया को किया आगाह, कहा- जोखिमों को समझना जरूरी

Sat, 26 Sep 2026 10:54 AM IST
अस्मिता त्रिपाठी एएनआई, न्यूयॉर्क
एएनआई, न्यूयॉर्क Published by: अस्मिता त्रिपाठी Updated Sat, 26 Sep 2026 10:54 AM IST
सार

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने समुद्री सुरक्षा में एआई के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर अवसरों और जोखिमों पर चर्चा की। उन्होंने सुरक्षित और जिम्मेदार एआई की जरूरत बताई। साथ ही भारत- जीसीसी एफटीए वार्ता का स्वागत किया। पढ़ें पूरी खबर

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Will AI security or threat at sea? Jaishankar warns world at the UN, says understanding the risks is crucial.
विदेश मंत्री एस. जयशंकर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार (स्थानीय समय) को समुद्री क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़े मौकों और सुरक्षा जोखिमों पर बात की। साथ ही, उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान भारत-खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के बीच मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर बातचीत शुरू होने का स्वागत किया।

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एक्स पर एक पोस्ट में जयशंकर ने कहा कि उन्हें ग्रीस के विदेश मंत्री जॉर्ज गेरापेट्रिटिस के साथ मिलकर 'अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के संदर्भ में एआई- समुद्री सुरक्षा पर खास जोर' विषय पर आयोजित कार्यक्रम की सह-अध्यक्षता करके खुशी हुई।'
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समुद्री क्षेत्र में एआई पर क्या बोले जयशंकर? 

  • एआई से मिलने वाले मौकों का फायदा उठाने, इसके नतीजों का अंदाजा लगाने और इसके जोखिमों को कम करने की जरूरत पर जोर दिया। इसके लिए ऐसे नजरिए की जरूरत है जो इनोवेशन को बढ़ावा दे और साथ ही सुरक्षा से जुड़े पहलुओं का भी ध्यान रखे।
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  •  एआई संसाधनों तक लोकतांत्रिक पहुंच, सुरक्षित और भरोसेमंद सिस्टम बनाने, इंसानी क्षमताओं में निवेश करने और आर्थिक विकास व सामाजिक भलाई के लिए एआई का इस्तेमाल करने पर जोर दिया गया है।
  • समुद्री क्षेत्र में एआई समुद्री गतिविधियों की जानकारी (मैरिटाइम डोमेन अवेयरनेस), खोज और बचाव, आपदा के समय कार्रवाई, संदिग्ध गतिविधियों की पहचान और बंदरगाहों व अहम बुनियादी ढांचे की मजबूती को बेहतर बना सकता है। साथ ही, यह जहाजों, कम्युनिकेशन नेटवर्क और समुद्र के नीचे के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने वाले एडवांस्ड सर्विलांस, कमजोरियों का पता लगाने (वल्नरेबिलिटी मैपिंग) और साइबर ऑपरेशन को भी मुमकिन बना सकता है।
  • इसमें जिम्मेदारी तय करने, जवाबदेही और मामलों को आगे बढ़ाने जैसे सवाल शामिल हैं, साथ ही फैसला लेने में लगने वाले समय को भी कम किया जा सकता है।
  • समुद्री क्षेत्र में, यूएन चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून (जिसमें समुद्र का कानून भी शामिल है) देशों के व्यवहार को नियंत्रित करने वाले जरूरी आधार बने हुए हैं। यह पक्का करने के लिए कि एआई का विकास और इस्तेमाल इन सिद्धांतों के अनुसार हो। ज्यादा पारदर्शिता, भरोसा बढ़ाने के उपाय, क्षमता विकास, तकनीकी सहयोग और बेहतरीन तौर-तरीकों का आदान-प्रदान जरूरी है। 

जीसीसी बैठक पर क्या कहा? 
वहीं, एक्स अन्य पोस्ट में जयशंकर ने कहा कि उन्हें '#UNGA81 के दौरान न्यूयॉर्क में भारत-खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) ट्रोइका मंत्रिस्तरीय बैठक की सह-अध्यक्षता करके खुशी हुई।' उन्होंने कहा कि बैठक में 'भारत-जीसीसी संयुक्त कार्य योजना 2024-28 की प्रगति की समीक्षा की गई। इसके साथ ही हमारी साझेदारी को और आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की गई।'

जयशंकर ने यह भी कहा, 'भारत-जीसीसी एफटीए बातचीत शुरू होने का स्वागत है। व्यापार, निवेश, ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य, नई तकनीकों, संस्कृति और लोगों के बीच आपसी आदान-प्रदान के क्षेत्रों में संबंध मजबूत करने की उम्मीद है। भारतीय समुदाय को दिए गए समर्थन के लिए जीसीसी नेतृत्व का धन्यवाद किया।



ब्रिक्स को लेकर कही ये बात
वहीं, उन्होंने आगे कहा कि ब्रिक्स जैसे समूहों का बनना संयुक्त राष्ट्र का विकल्प नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ब्रिक्स संयुक्त राष्ट्र और उसमें सुधार का समर्थन करता है। न्यूयॉर्क में ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) द्वारा आयोजित और ओआरएफ के प्रेसिडेंट समीर सरन द्वारा संचालित एक इंटरैक्टिव सेशन में बोलते हुए, जयशंकर ने कहा कि ब्रिक्स समान सोच, हितों और नजरिए वाले देशों का समूह है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि ब्रिक्स समिट ने अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में संयुक्त राष्ट्र की केंद्रीय भूमिका को फिर से दोहराया है।

उन्होंने कहा, 'ध्यान दें, ब्रिक्स समिट में भी एक बात यह थी कि संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के केंद्र में है। इसलिए, यह 'ब्रिक्स या संयुक्त राष्ट्र' वाली बात नहीं है। ब्रिक्स संयुक्त राष्ट्र का समर्थन करता है। और, ब्रिक्स के ज्यादातर सदस्य संयुक्त राष्ट्र में सुधार चाहते हैं। कुछ सदस्य दूसरों की तुलना में ज्यादा चाहते हैं।'

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