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Ukraine: जेलेंस्की को सता रहा बंधक बनाए जाने का डर? पेरिस वार्ता से पहले क्यों बदला यूक्रेन का सुरक्षा प्रमुख

Mon, 05 Jan 2026 08:53 PM IST
हिमांशु चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कीव
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कीव Published by: हिमांशु चंदेल Updated Mon, 05 Jan 2026 08:53 PM IST
सार

पेरिस शांति वार्ता से पहले राष्ट्रपति जेलेंस्की ने यूक्रेन की सुरक्षा सेवा के प्रमुख को बदल दिया। इस फैसले को उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा और संभावित बंधक बनाए जाने की आशंका से जोड़कर देखा जा रहा है। रूस-यूक्रेन युद्ध जारी है, ऐसे में जेलेंस्की ने सुरक्षा पर कोई जोखिम न लेने का संकेत दिया है।

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why Zelenskyy replaces Ukraine security chief ahead of Paris talks fear of being taken hostage
वोलोदिमिर जेलेंस्की, यूक्रेन के राष्ट्रपति - फोटो : ANI

विस्तार

यूक्रेन-रूस युद्ध के बीच राष्ट्रपति जेलेंस्की का एक बड़ा और चौंकाने वाला फैसला सामने आया है। पेरिस में होने वाली अहम शांति वार्ता से ठीक पहले उन्होंने देश की सुरक्षा सेवा के प्रमुख को बदल दिया। इस कदम को केवल प्रशासनिक फेरबदल नहीं, बल्कि जेलेंस्की की व्यक्तिगत सुरक्षा और संभावित खतरे से जोड़कर भी देखा जा रहा है। सवाल उठ रहा है कि क्या जेलेंस्की को यह डर सता रहा है कि कहीं रूस उन्हें बंधक बनाने की कोशिश न करे।

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जेलेंस्की ने यूक्रेन की सुरक्षा सेवा एसबीयू के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल वासिल मालियुक का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है और उनकी जगह 'ए' स्पेशल ऑपरेशंस सेंटर के पूर्व प्रमुख येवहेन खमारा को कार्यवाहक प्रमुख नियुक्त किया है। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब जेलेंस्की पेरिस जाकर सहयोगी देशों से सुरक्षा गारंटी पर अंतिम बातचीत करना चाहते हैं। माना जा रहा है कि इस बदलाव का मकसद सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह अपने भरोसेमंद हाथों में रखना है।
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बंधक बनने का डर क्यों?
अंतरराष्ट्रीय राजनीति में वेनेजुएला के राष्ट्रपति को बंधक बनाए जाने की घटना ने छोटे और संघर्षरत देशों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति को लेकर दिए गए कड़े संदेश और कार्रवाई ने दुनिया भर में हलचल मचा दी है। ऐसे में रूस से सीधे युद्ध लड़ रहे यूक्रेन के राष्ट्रपति को लेकर यह आशंका जताई जा रही है कि जेलेंस्की अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्क हो गए हैं।

संदेश क्या देना चाहते हैं जेलेंस्की
सुरक्षा प्रमुख को बदलकर जेलेंस्की ने साफ संकेत दिया है कि वह न तो अपनी सुरक्षा को हल्के में लेना चाहते हैं और न ही शांति वार्ता के दौरान किसी तरह का जोखिम। यह फैसला यह भी दिखाता है कि अगर शांति प्रयास नाकाम होते हैं, तो यूक्रेन हर स्तर पर खुद को मजबूत रखने के लिए तैयार है। बंधक बनने की आशंका सच हो या रणनीतिक सोच, जेलेंस्की का यह कदम दुनिया को सतर्क संदेश जरूर देता है।


सुरक्षा गारंटी और सैनिक तैनाती
पेरिस में होने वाली बैठक में करीब 30 देश शामिल होंगे, जिन्हें 'कोएलिशन ऑफ द विलिंग' कहा जा रहा है। यहां इस बात पर चर्चा होनी है कि क्या ये देश यूक्रेन के भीतर या आसपास अपने सैनिक तैनात करेंगे और युद्धविराम की निगरानी कौन करेगा। रूस पहले ही कह चुका है कि वह यूक्रेन की धरती पर नाटो देशों की मौजूदगी स्वीकार नहीं करेगा। ऐसे माहौल में जेलेंस्की की सुरक्षा चिंता और गहरी हो जाती है।

जमीनी हालात अब भी गंभीर
यूक्रेन के दक्षिणी और पूर्वी हिस्सों में करीब एक हजार किलोमीटर लंबी सीमा पर लड़ाई थमी नहीं है। हाल ही में रूसी ड्रोन हमले में कीव के एक निजी क्लीनिक में एक मरीज की मौत हो गई और कई लोग घायल हुए। रूस ने एक ही रात में कई मिसाइलें और ड्रोन दागे, जबकि यूक्रेन ने भी जवाबी ड्रोन हमले किए। इन हालात में किसी भी बड़े नेता की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बन जाती है।

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